मैच (6)
IPL (2)
ACC Premier Cup (2)
Women's QUAD (2)
फ़ीचर्स

स्पिन होती पिचों पर भी भारत के लिए घातक साबित हो सकते हैं पैट कमिंस

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने दिखाया है कि वह निरंतरता के साथ लंबे स्पेल डालने में सक्षम हैं

बतौर कप्तान भारत के पहले टेस्ट दौरे पर आए हैं पैट कमिंस  •  Associated Press

बतौर कप्तान भारत के पहले टेस्ट दौरे पर आए हैं पैट कमिंस  •  Associated Press

जहां एक तरफ़ जोफ़्रा आर्चर और जसप्रीत बुमराह जैसे विश्व के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ चोटिल होकर लगातार क्रिकेट से दूर रह रहे हैं, ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस टेस्ट एकादश के नियमित सदस्य रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पिछले 52 में से 46 टेस्ट मैचों में हिस्सा लिया हैं और केवल नेथन लायन (50) ने इस अवधि में उनसे अधिक टेस्ट खेले हैं। यह नियमितता कमिंस की सबसे बड़ी विशेषता है।
हालांकि ऐसा हमेशा नहीं था। नवंबर 2011 में अपने डेब्यू मैच में प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे कमिंस को दोबारा टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए चोट से परेशान करने वाले साढ़े पांच साल का इंतज़ार करना पड़ा।
मार्च 2017 में उन्होंने रांची में वापसी की और दुनिया को अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 39-10-106-4 के आंकड़े इतने बेहतरीन नहीं थे लेकिन दो कारणों के वजह से वह प्रदर्शन बहुत ख़ास था।
पहला कारण यह था जिसके बारे में कमिंस ने शनिवार को बात की। बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ के लिए भारत पहुंचने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कमिंस ने इस पर अपने विचार व्यक्त किए।
रांची टेस्ट से पहले के 18 महीनों में कमिंस ने केवल एक प्रथम श्रेणी मैच खेला था और चोटिल होने के उनके रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए किसी को नहीं पता था वह इतना कार्यभार संभाल पाएंगे या नहीं। हालांकि उन्होंने 39 ओवर गेंदबाज़ी की और भारत ने नौ विकेट पर 603 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की। आज तक कमिंस ने एक टेस्ट पारी में इतने ओवर नहीं डाले हैं।
कमिंस ने कहा, "वह छह सालों में मेरा पहला टेस्ट मैच था और मैंने अपने बारे में सीखा और उसने मुझे एहसास कराया कि मैं यही रहना चाहता था। टेस्ट क्रिकेट में आप अपने शरीर या अन्य चीज़ों के बारे में चिंतित नहीं हो सकते, आपको बस अपना सब कुछ देना पड़ता है। मैंने इसका बहुत आनंद लिया।"
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि यह सबक़ भी मिला कि टेस्ट क्रिकेट बहुत कठिन हो सकता है। आपको स्वीकार करना होगा कि यह कभी कठिन परिश्रम हो सकता है और आपको इसके लिए तैयार रहते हुए चुनौती को अपनाना होगा। भारत आने पर ज़्यादातर चर्चा स्पिन होती पिच की होती है और तेज़ी से आगे बढ़ते टेस्ट मैचों की लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है और तेज़ गेंदबाज़ की भूमिका कम सफलता के बावजूद अधिक ओवर डालने की हो जाती है। मैंने पिछले दौरे पर इसका आनंद लिया था।"
कमिंस के रांची वाले प्रदर्शन को और विशेष बनाने का दूसरा कारण यह था कि ऑस्ट्रेलिया के अन्य गेंदबाज़ों के लिए इतनी धीमी और निरस लग रही पिच पर कमिंस ने भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान किया। अपनी गति, नई गेंद के साथ साधारण स्विंग और पुरानी गेंद के साथ रिवर्स स्विंग और ऑफ़ कटर बाउंसर का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने चार विकेट लेकर भारत को ऐसी स्थिति पर ला खड़ा किया था जहां छह विकेट गंवाने के बाद भारत पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के स्कोर से 123 रन पीछे था।
चेतश्वर पुजारा और ऋद्धिमान साहा ने सातवें विकेट के लिए 199 रन जोड़ते हुए भारत की वापस करवाई। हालांकि इस बीच कमिंस ने ऑस्ट्रेलिया को दिखाया कि भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर उनके पास घातक साबित होने की कला और स्टैमिना दोनों है।
ऑस्ट्रेलिया जानता है कि 2004 के बाद भारत में अपनी पहली सीरीज़ जीत के प्रयास में स्पिन के साथ-साथ पेस की अहम भूमिका रहेगी। 2004 में जेसन गिलेस्पी और ग्लेन मैक्ग्रा ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ थे और उन्होंने तीन तेज़ गेंदबाज़ों और एक स्पिनर के संयोजन से टीम को बेंगलुरु और नागपुर में जीत दिलाई थी।
इस सीरीज़ से पहले ऑस्ट्रेलियाई ख़ेमे से जुड़ी चर्चा यह है कि ऐश्टन एगार, मिचेल स्वेप्सन और टॉड मर्फ़ी में से कौन लायन का स्पिन जोड़ीदार होगा। कमिंस ने बताया कि वह तीन तेज़ गेंदबाज़ों और एक स्पिनर के साथ भी जा सकते हैं।
कमिंस ने कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि (दो स्पिरों का खेलना) तय है। यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। नागपुर पहुंचने के बाद हम इस पर विचार करेंगे। मुझे लगता है कि कभी-कभी स्पिनरों की इतनी बात होती है कि लोग भूल जाते हैं कि सभी परिस्थितियों में हमारे तेज़ गेंदबाज़ कितने कारगर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "देखिए सिडनी की कुछ पिचों पर तेज़ गेंदबाज़ों के लिए ज़्यादा कुछ नहीं रहा है लेकिन गेंदबाज़ों ने तरीक़ा ढूंढ निकाला है। हमारा पास गेंदबाज़ी के कई विकल्प हैं। हम उन गेंदबाज़ों को चुनेंगे जो 20 विकेट ले सकते हैं।"
ऑस्ट्रेलिया का सबसे हालिया टेस्ट मैच ऐसी ही एक सपाट और धीमी पिच पर आया था। बारिश ने ऑस्ट्रेलिया की जीत की उम्मीदों पर पानी फर दिया लेकिन कमिंस ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हुए टीम को जीत की राह पर ला खड़ा किया था।
पिछले साल लाहौर में भी कमिंस ने इस तरह की गेंदबाज़ी करत हुए पहली पारी में पांच और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए थे। ऑस्ट्रेलिया ने स्पाट परिस्थितियों में सीरीज़ अपने नाम की थी।
पाकिस्तान के विरुद्ध उस सीरीज़ में कमिंस ने केवल निरंतर बल्कि घातक भी रहे थे। अगले छह हफ़्तों में दोनों टीमों के सुपरस्टार खिलाड़ियों के साथ-साथ पिचों को लेकर बहुत सवाल उठेंगे। पिच कैसी भी हो, कमिंस ने छह साल पहले दिखाया था कि वह रांची में भी भारत के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।