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जितेश शर्मा: मजबूरी में क्रिकेट खेलना शुरू किया, फिर सचिन सर और माही भाई की वजह से मज़ा आने लगा

पंजाब किंग्स के विकेटकीपर बल्लेबाज़ जितेश शर्मा पहली बार श्रीलंका के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में भारतीय दल का हिस्सा बने थे

"जब पहली बार सचिन तेंदुलकर सर को मैंने ड्रेसिंग रूम में देखा तो बस उन्हें ही देखता रहता था...उनकी बातें सुनने का मन करता रहता था...लगता था कि बस अब ज़िंदगी से और क्या चाहिए।"
ये बात उस खिलाड़ी ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के साथ साझा की है जिसका सपना कभी क्रिकेटर बनने का नहीं था बल्कि एनडीए (नेशनल डिफ़ेंस ऐकेडमी) में शामिल होकर वह देश की सेवा करना चाहता था। लेकिन आज वही खिलाड़ी न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में भारतीय दल का हिस्सा है।
हम बात कर रहे हैं हंसमुख और अपनी बल्लेबाज़ी की तरह बिंदास जवाब देने वाले जितेश शर्मा की। अमरावती में जन्में और विदर्भ से क्रिकेट खेलते हुए जितेश मुंबई इंडियंस का भी हिस्सा रह चुके हैं और फिर पंजाब किंग्स की तरफ़ से खेलते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा को अपना आदर्श मानने वाले जितेश शुरुआत में कभी क्रिकेट को लेकर गंभीर नहीं थे, बल्कि एनडीए में जाने के लिए उन्होंने सिर्फ़ इसलिए क्रिकेट खेला ताकि उन्हें चार प्रतिशत अतिरिक्त अंक मिल जाएं।
"क्रिकेट मैं कभी खेलना ही नहीं चाहता था। अगर साफ़ तौर पर कहूं तो क्रिकेट में मेरा कभी इंटरेस्ट नहीं था। मैं प्लास्टिक गेंद से क्रिकेट खेलता था। मैंने स्कूल में चार प्रतिशत अतिरिक्त नंबर के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया, क्योंकि हमारे महाराष्ट्र में अगर आप दसवीं कक्षा में स्टेट लेवल का कोई स्पोर्ट्स खेलते हैं तो आपको चार प्रतिशत अतिरिक्त नंबर मिलते हैं। मैं तब स्कूल के लिए फ़ुटबॉल खेलता था। मेरे दोस्तों ने कहा कि हमारी स्कूल की टीम क्रिकेट में अच्छा करती है। अगर हम राज्य की टीम में सेलेक्ट हो गए तो हमें चार प्रतिशत अतिरिक्त नंबर मिलेगा। मैंने उसी लालच में स्कूल की टीम के लिए ट्रायल दे दिया। उस समय टीम में एक विकेटकीपर की कमी थी और मैंने बोल दिया कि मैं कीपर ही हूं और उसके बाद मैंने कीपिंग शुरू कर दी। इसके बाद बारहवीं में फिर से अतिरिक्त नंबर की लालच में क्रिकेट खेला। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि एनडीए की परीक्षा पास करने के लिए मुझे अतिरिक्त नंबर की ज़रूरत थी।"
जितेश शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज़, पंजाब किंग्स
जितेश की इसी लालच ने उन्हें उस मुक़ाम तक पहुंचा दिया जो दूसरों के लिए किसी सपने से कम नहीं, भले ही वह एनडीए में शामिल होकर देश की सुरक्षा में अपना योगदान न दे रहे हों। लेकिन आज वह देश के लिए क्रिकेट खेलने के बेहद क़रीब आ गए हैं। पहली बार उन्हें श्रीलंका के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में चोटिल संजू सैमसन के बैकअप के तौर पर जोड़ा गया था और अब न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ भी वह भारतीय टी20 दल का हिस्सा हैं।
"सच बोलूं तो मैंने ये उम्मीद नहीं की थी कि भारतीय टीम में मेरा नाम आएगा, क्योंकि पहले ही टीम की घोषणा हो चुकी थी। मुझे पता था कि अगर मैं भारतीय टीम में शामिल होना चाहता हूं तो इस साल भी मुझे आईपीएल में अच्छा करना होगा। मेरे दिमाग़ में वही था और मैं रणजी ट्रॉफ़ी की टीम में नहीं था तो मैं अपना पूरा समय तैयारी में लगा रहा था। इसके बाद दुर्भाग्यपूर्ण तरीक़े से संजू चोटिल हो जाते हैं तो फिर मुझे बुलावा आया। मैं तो एकदम अचंभित था, मुझे ज़्यादा कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैं काफ़ी इमोशनल भी था। मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं किसे कॉल करके इस बारे में बताऊं। पापा को बताऊं या फिर छोटे भाई को बताऊं,या फिर दोस्तों को फ़ोन करूं। इसके बाद कुछ देर के लिए मैं शांत हुआ और फिर मैंने पापा को फोन किया। अपने छोटे भाई को बताया। सभी बहुत खु़श थे।"
जितेश शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज़, पंजाब किंग्स
आईपीएल में मुंबई इंडियंस और पंजाब किंग्स का हिस्सा रह चुके जितेश ने अब तक पंजाब के लिए 12 आईपीएल मुक़ाबले खेले हैं जिनमें उनके नाम 29.25 की औसत 163.64 के स्ट्राइक रेट से 234 रन हैं। मुंबई इंडियंस से भले ही उन्हें कोई मैच खेलने का मौक़ा न मिला हो लेकिन सचिन तेंदुलर और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के साथ जहां उन्होंने बेहद यादगार पल बिताए। लेकिन जितेश का असली फ़ैन मोमेंट तो तब आया जब चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ मैच के दौरान उन्हें अपने आदर्श और विकेटकीपिंग गुरु महेंद्र सिंह धोनी से बातचीत करने का वक़्त मिल गया। हालांकि इस मुलाक़ात का श्रेय वह भारत और विदर्भ की ओर से खेल चुके अंबाती रायुडू को देते हैं।
"अंबाती रायुडू, जो विदर्भ के लिए भी खेल चुके हैं, उन्होंने माही भाई से मेरी बात कराई। मैंने उनसे पूछा था कि मै अभी इस लेवल पर आया हूं तो आगे मैं ख़ुद को कैसै और ज़्यादा बड़ा कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि क्रिकेट सब जगह एक समान होता है। जैसे सैयद मुश्ताक़ अली में जो इंटेंसिटी होती है, वह कम होती है। आईपीएल की इंटेंसिटी थोड़ी ज़्यादा होती है और भारतीय टीम की थोड़ी और ज़्यादा होती है। बस आपको उसी के लिए तैयारी करनी है। आपको ख़ुद को बिल्कुल बदलने की ज़रूरत नहीं है। बस आप इंटेंसिटी बदलते रहिए।"
जितेश शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज़, पंजाब किंग्स
इस इंटरव्यू के दौरान जितेश की बातों और आंख़ों में एक चीज़ और देखने को मिली और वह था उनके दिल के अंदर बह रहा भावनाओं का समंदर। मानों वह उसे शांत रखते हुए मैदान पर विकेट के पीछे और सामने उसे अपने प्रदर्शन के ज़रिए सभी के सामने लाने को बेचैन हों।

सैयद हुसैन ESPNCricinfo हिंदी में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट हैं।@imsyedhussain