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शहबाज़ नदीम : भारत के लिए सिर्फ़ दो टेस्ट खेलने का मलाल तो है लेकिन मैं ख़ुशक़िस्मत भी हूं

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हाल ही में शहबाज़ ने 500 विकेट हासिल किए हैं और अब उनकी नज़र टीम इंडिया में वापसी पर है

बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 80 किलो मीटर दूर स्थित मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले से अपने क्रिकेट का सफ़र शुरू करने वाले बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ शहबाज़ नदीम ने अपना नाम उस फ़ेहरिस्त में शुमार कर लिया है, जहां तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं।

भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेल चुके झारखंड के इस स्पिन गेंदबाज़ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 500 विकेट हासिल कर लिए हैं।
इतना ही नहीं रणजी ट्रॉफ़ी में भी उनके नाम 16 जनवरी 2023 तक 381 विकेट हैं। भारत की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में शहबाज़ फ़िलहाल 12वें स्थान पर हैं।

बेहद शांत स्वभाव और कम बोलने वाले शहबाज़ ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के साथ बातचीत में अपनी इस उपलब्धि पर दिल खोलकर बात की और कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका नाम उस फ़ेहरिस्त में शुमार हो गया जहां ज़्यादा खिलाड़ी नहीं हैं।
"काफ़ी अच्छा लगता है जब आप इतने सालों से क्रिकेट खेल रहे होते हैं और ऐसे मुक़ाम पर पहुंचते हैं जहां आप प्रथम श्रेणी में 500 विकेट हासिल कर लेते हैं। बतौर क्रिकेटर आप फिर काफ़ी अच्छा फ़ील करते हैं और आपको संतुष्टि मिलती है। आप चाहे अपने देश के लिए खेलें या फिर अपने राज्य के लिए लेकिन यह सोचकर काफ़ी गर्व महसूस होता है कि आपने वह मुक़ाम हासिल किया है जहां बहुत कम ही लोग पहुंच पाए हैं।"
शहबाज़ नदीम, भारतीय क्रिकेटर
शहबाज़ के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे और जब मुज़फ़्फ़रपुर से उनका ट्रांसफ़र धनबाद (अब झारखंड में स्थित) हुआ तो फिर वहां से ही उनके करियर ने एक नया आकार लिया। 2004 में उन्हें पहली बार झारखंड की तरफ़ से केरला के ख़िलाफ़ खेलने का मौक़ा मिला और यहीं से उनके अद्भुत रणजी करियर का सफ़र शुरू हुआ।
हालांकि अपने डेब्यू मैच में उन्हें सिर्फ़ दो विकेट ही हासिल हुए थे। लेकिन इसके बाद की कहानी यह रही कि आज वह इस प्रतियोगिता में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में शुमार हैं और अब रणजी ट्रॉफ़ी में सर्वाधिक विकेट लेने से भी वह बहुत ज़्यादा पीछे नहीं हैं।

रणजी ट्रॉफ़ी में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड राजेंद्र गोयल के नाम है, जिन्होंने 637 विकेट झटके थे। संयोग देखिए वह भी एक बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ ही थे। जब हमने शहबाज़ से यह जानना चाहा कि क्या उनका अगला लक्ष्य 600 विकेटों का है, तो उन्होंने कहा कि लक्ष्य तो नहीं सोचा है लेकिन इस सफ़र के दौरान अगर वहां तक पहुंच गया तो काफ़ी अच्छा लगेगा।
शहबाज़ और संयोग - मानो एक दूसरे के ही साथी हैं। जिस तरह से उन्होंने अपना पहला प्रथम श्रेणी मुक़ाबला अपने घरेलू मैदान जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेला था, ठीक वैसे ही 15 साल बाद शहबाज़ का टेस्ट डेब्यू भी उनके घरेलू मैदान रांची में ही हुआ। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ इस टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शहबाज़ ने दो-दो विकेट झटके थे, हालांकि इसके बाद उन्हें अपने अगले टेस्ट के लिए दो साल का इंतज़ार करना पड़ा था।
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेले गए अपने दूसरे और आख़िरी टेस्ट मैच में उन्हें इंग्लैंड के कप्तान जो रूट की ऐतिहासिक पारी का सामना करना पड़ा था। रूट ने अपने 100वें टेस्ट में दोहरा शतक जड़ा था और शहबाज़ के ख़िलाफ़ काफ़ी आक्रामक शॉट्स खेले थे, हालांकि रूट की 217 रन की उस पारी पर विराम भी शहबाज़ ने ही लगाया था। लेकिन उसके बाद दोबारा शहबाज़ को भारतीय जर्सी पहनने का मौक़ा नहीं मिला।
लगभग दो दशकों से प्रथम श्रेणी मैच खेल रहे इस 33 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर ने अभी भी टीम इंडिया में वापसी की उम्मीदों को ज़िंदा रखा है। इसके लिए आज भी वह वही कर रहे हैं जो 19 सालों से करते आ रहे हैं और वह है हर सीज़न में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में ख़ुद को शुमार करना।
"मेरे हाथ में बस यह है कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा विकेट लेता रहूं और मैं वही कर भी रहा हूं। पिछले सीज़न मैं सर्वाधिक विकेट लेने वाली सूची में तीसरे स्थान पर था और इस सीज़न में भी मैं अब तक पांच मैचों में 30 विकेट ले चुका हूं। मुझे लगता है कि जब घरेलू क्रिकेट की बात आती है तो अगर सीज़न के आख़िर में मैं सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में शामिल रहता हूं तो फिर आज नहीं तो कल इंशाल्लाह मुझे दोबारा ज़रूर मौक़ा मिल सकता है।"
शहबाज़ नदीम, भारतीय क्रिकेटर
शहबाज़ नदीम की नज़र फ़िलहाल आज यानी 17 जनवरी से शुरू हुए झारखंड के अहम मुक़ाबले पर है, पुडुचेरी के ख़िलाफ़ यह मैच झारखंड के लिए अगले दौर में जाने की दौड़ में बने रहने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सैयद हुसैन ESPNCricinfo हिंदी में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट हैं।@imsyedhussain