साउथ अफ़्रीका क्रिकेटर संगठन (एसएसीए) ने इच्छा व्यक्त की है कि पुरुष राष्ट्रीय टीम नस्लवाद के ख़िलाफ़ घुटने टेकने के मामले में समान दृष्टिकोण अपनाए। इसी के साथ एसएसीए ने क्रिकेट साउथ अफ़्रीका (सीएसए) के इसे एक विश्व-स्तरीय प्रतियोगिता में अनिवार्य बनाए जाने के फ़ैसले पर भी आलोचना जताई है।

सोशल जस्टिस और नेशन बिल्डिंग (एसजेएन) की सुनवाई के दौरान एसएसीए के मुख्य कार्यकारी अफ़सर ऐंड्रयू ब्रीटज़का ने कहा कि मंगलवार को क्विंटन डिकॉक के इस निर्देश के ना मानने पर टीम में शामिल ना होने से टीम पर 'संकट' का साया आ गया है। उनका कहना है कि वह डिकॉक के साथ इस परिस्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्रीटज़का ने कहा, "मैं चाहूंगा की घुटने टेकने के मामले में हम समानता रखें। एसएसीए चाहेगा कि टीम एक जुट होकर घुटने टेकने पर फ़ैसला लें लेकिन हम किसी को ऐसा करने में विवश नहीं करना चाहते।"

ब्रीटज़का ने यह भी कहा कि 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन और उसके महत्व को लेकर टीम में काफ़ी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा, "संस्कृति और विविधता पर दूसरे देशों से इस टीम में काफ़ी बात हुई है। ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन, घुटने टेकने का प्रतीक और विविध परिपेक्ष्य से आने वाले साथियों के साथ एक टीम में होने पर इन खिलाड़ियों ने आपस में कई बातें की हैं।"

ब्रीटज़का का कहना था कि घुटने टेकने पर फ़ैसला विश्व कप में जाने से पहले ले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, "इस मामले का हल कुछ समय पहले निकालना चाहिए था। एक आईसीसी प्रतियोगिता में इस बात ने टीम में संकट का माहौल बना दिया है।"

सीएसए ने डिकॉक के फ़ैसले पर कोई कार्यवाई करने से पहले टीम प्रबंधन से अधिक जानकारी मिलने की प्रतीक्षा करना ठीक समझा है। साउथ अफ़्रीका टीम ने बताया है कि डिकॉक "फ़िलहाल विश्व कप दल का अहम भाग हैं और उनके घर लौटने की कुछ ख़बरें ग़लत हैं"। ऐसा बताया जा रहा कि इस विषय पर डिकॉक ने कोई टिप्पणी नहीं जारी की है लेकिन वह उसी के तैयारी में जुटे हैं।

फ़िरदौस मूंडा ESPNcricinfo की साउथ अफ़्रीकी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सीनियर असेस्टिंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।