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कैसे राजापक्षा और हसरंगा मैच को पाकिस्तान से दूर ले गए

हसरंगा जब अपने आक्रामक रंग दिखा रहे थे, तब राजापक्षा सूझ-बूझ के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ा रहे थे

खेल की दुनिया में 'मोंमेंटम' एक ऐसी चीज़ है, जिसे काफ़ी कम महत्व दिया जाता है। हालांकि एक बात है यह भी है कि किसी भी मैच में यह काफ़ी धीरे-धीरे तैयार होता है लेकिन इसे फ़िसलने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता। पाकिस्तान के साथ भी एशिया कप के फ़ाइनल में कुछ ऐसा ही हुआ। एक समय पर श्रीलंका सिर्फ़ 58 के स्कोर पर पांच विकेट गंवा चुका था। मोमेंटम पाकिस्तान के पक्ष में था। उस वक़्त तक पाकिस्तान के लिए मैच में हर चीज़ सही हो रहा था। हालांकि उसके बाद जैसे ही पाकिस्तान ने मोंमेटम पर अपनी पकड़ ढीली की। अचानक से सारी चीज़े बदल गईं। यहीं से श्रीलंका के पास मैच में वापसी करने का मौक़ा मिल गया।
इसी मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए वनिंदु हसरंगा और भानुका राजापक्षा ने एक कमाल की साझेदारी की और श्रीलंका को वापस मैच में ला दिया। इन दोनों बल्लेबाज़ों ने 36 गेंदों में 58 रन बटोरे और यहीं से मोमेंटम श्रीलंका के पक्ष में आ गया। इसके बाद शादाब ख़ान ने अंत में दो कैच भी छोड़ दिए जिससे हालात पाकिस्तान के लिए और ख़राब होते चले गए।
जब राजापक्षा सोच समझ कर खेल रहे थे, तब हसरंगा ने साहसी होते हुए कई बड़े शॉट लगाए। इससे पहले नसीम शाह की धारदार गेंदबाज़ी ने श्रीलंका की शुरुआत को ख़राब कर दिया था और यहां से श्रीलंका को जैसे-तैसे एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने की लड़ाई लड़नी थी। हालांकि राजापक्षा और हसरंगा कुछ अलग ही मूड में थे। ऐसा लगा मानों पाकिस्तान ने एक छोट से अंतराल के लिए झपकी मारी हो और श्रीलंका के खिलाड़ी उस मोमेंटम को अपने पक्ष में लेकर चले गए।
राजापक्षा का आत्मविश्वास उनके हालिया बल्लेबाज़ी फ़ॉर्म से उपजा है। पिछले मैच में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उन्होंने 24 रनों की छोटी लेकिन अच्छी पारी खेली थी। ऐसा लग रहा था कि वह बस पिछले मैच में जहां से अपनी पारी को छोड़ कर गए थे, वहीं से फिर अपनी पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
उनके आने से केवल एक गेंद पहले हारिस रउफ़ ने दनुष्का गुनातिलका के विकेट को एक 151 किमी/घंटा की गति से की गई गेंद से मैदान की सैर पर भेजा था। तीन गेंदों में ही राजापक्षा को इस गति का स्वाद मिल गया, जब गेंद उनके अंगूठे पर लगी। यह उस मैच की सबसे बेहतरीन यॉर्कर गेंदों में से एक थी। इस गेंद पर पगबाधा की भी अपील हुई थी लेकिन अंपायर ने इसे नकार दिया। उसके बाद रिव्यू भी लिया लिया गया लेकिन बहुत कम फासलों से मैदानी अंपायर का फ़ैसला बरक़रार रहा।
यही कारण है कि वह श्रीलंका को रोमांचित और निराश कर दोनों सकते हैं। उनकी किताब में सभी शॉट्स हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में अपनी टीम को कई बार निराश भी किया है। इसका एक कारण यह भी है कि उन्हें अपनी क्षमताओं के बारे में पूरी तरह से पता नहीं है।
हालांकि राजापक्षा को धीरे-धीरे अपने खेल के प्रति सच्चे रहने और अपने अंदर के गुणों का एहसास होने लगा है। रविवार को उन्होंने एक घायल दाहिने कंधे के साथ बहुत कुछ किया, जिसके बाद श्रीलंका ऐसी जीत मिली, जो सालों तक याद रखा जाएगा।

शशांक किशोर ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।