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टी20 के बाद क्या वनडे में अपनी छाप छोड़ पाएंगे सूर्यकुमार?

शानदार फ़ॉर्म में होने के बावजूद भारतीय वनडे एकादश में जगह बनाना आसान नहीं होगा

टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव की सनसनी से दर्शकों के मन में एक सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वह इसी प्रकार अन्य प्रारूपों में सफलता हासिल कर सकते हैं? श्रीलंका के विरुद्ध राजकोट में तीसरे टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच में उनके शतक के बाद तो गौतम गंभीर ने ट्वीट करते हुए कहा कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में आज़माया जाना चाहिए। टेस्ट और टी20 अंतर्राष्ट्रीय प्रारूप क्रिकेट के दो अलग छोर हैं और अभी के लिए हम इन दोनों के बीच के प्रारूप यानि वनडे की बात करते हैं।
भले ही टी20 क्रिकेट के फ़ॉर्म को देखते हुए सूर्यकुमार को वनडे में अधिक मौक़े दिए जाने चाहिए लेकिन यह विश्व कप का साल है और भारत के पास मध्य क्रम में स्थान कम और दावेदार बहुत सारे हैं। पिछले दो वर्षों में चौथे और छठे नंबर के बीच कम से कम पांच पारियां खेलने वाले सभी खिलाड़ियों में लगभग हर किसी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उन सबमें सूर्यकुमार के आंकड़े उत्साहजनक नहीं है।
वनडे क्रिकेट में सूर्यकुमार की शुरुआत शानदार रही थी। आठ पारियों के बाद उनकी औसत 53.40 और स्ट्राइक रेट 103.08 का था। हालांकि अगली आठ पारियों में वह चार बार 10 से कम और दो बार 20 से कम के स्कोर पर आउट हुए हैं।
ऊपर दिए गए टेबल में सूर्यकुमार और श्रेयस अय्यर की ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके पास बहुमुखी प्रतिभा नहीं है। ऋषभ पंत, के एल राहुल और संजू सैमसन विकेटकीपिंग का विकल्प प्रदान करते हैं। हालांकि अगर सूर्यकुमार अपनी टी20आई फ़ॉर्म को जारी रख पाते हैं तो वह वनडे में भी भारत के मैच-विनर बन सकते हैं।
सूर्यकुमार के लिस्ट-ए करियर के आंकड़े इतने शानदार नहीं है। 104.19 के स्ट्राइक रेट और 36.58 की औसत से उन्होंने 2854 रन बनाए हैं। हालांकि पिछले चार वर्षों में उनके बल्ले से 45.75 की औसत और 122 के स्ट्राइक रेट से 1647 रन निकले हैं।
इन सभी बातों के बावजूद यह ध्यान में रखने योग्य है कि विश्व कप केवल नौ महीने दूर है और कुछ नया करने के लिए समय कम है। वैसे तो भारत को उन्हें कम से कम लगातार छह मैचों (तीन बनाम श्रीलंका और तीन बनाम न्यूज़ीलैंड) में खेलने का अवसर देना चाहिए लेकिन इसका अर्थ यह होगा कि राहुल या श्रेयस में से किसी एक को बाहर बैठना होगा। हालांकि भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने एक अगल रवैये का संकेत दिया है।
श्रीलंका के विरुद्ध पहले वनडे से पूर्व रोहित ने कहा, "समस्या तब होती है जब हम विभिन्न प्रारूपों की तुलना करना शुरू करते हैं। हमें देखना होता है कि किन खिलाड़ियों ने वनडे प्रारूप में हमारे लिए अच्छा किया है। किस स्थिति में उन्होंने अच्छा किया है - वह सभी दबाव में रहे हैं और उन्होंने बल्लेबाज़ी करते हुए रन बनाए हैं। निर्णय लेने से पहले आपको इन सभी चीज़ों को ध्यान में रखना पड़ता है।"
रोहित ने आगे कहा, "मैं फ़ॉर्म को समझता हूं। फ़ॉर्म महत्वपूर्ण है लेकिन प्रारूप भी महत्वपूर्ण है। 50 ओवर का प्रारूप टी20 प्रारूप से थोड़ा लंबा और अलग है और जिन खिलाड़ियों ने वनडे में अच्छा किया है उन्हें मौक़ा मिलेगा। हम अपनी सोच में बहुत स्पष्ट हैं।"
अब सब सूर्यकुमार पर निर्भर करता है कि वह टीम को समझाए कि वह वनडे और उसकी अनूठी चुनौतियों के लिए तैयार हैं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या वह यहां भी उसी मानसिकता के साथ बल्लेबाज़ी कर सकते हैं।
वनडे में 10 ओवर बाद दो विकेट पर 50 रन या 15 ओवर बाद तीन विकेट पर 75 के स्कोर पर बल्लेबाज़ी करने आना टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में छह ओवर बाद दो विकेट पर 50 रन पर क्रीज़ पर आने से बहुत अलग है। वहां उन्हें पहली गेंद से आक्रमण करने की आज़ादी है, क्योंकि विकेटों पर प्रीमियम कम होता है, लेकिन क्या वह वनडे में भी उसी तरह से बल्लेबाज़ी कर सकते हैं?
इंग्लैंड ने दिखाया है कि ऐसा किया जा सकता है लेकिन उन्होंने अपनी पूरी टीम इसी विचारधारा के इर्द-गिर्द बनाई है। भारत और अन्य टीमें भविष्य में उनसे बराबरी कर सकती हैं लेकिन अभी के लिए नहीं।
वनडे में और भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एक गेंदबाज़ के पास अधिकतम 10 ओवर डालने की अनुमति होती है और कप्तान सूर्यकुमार के क्रीज़ पर आते ही अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ को गेंद थमा सकता है। वे लंबी अवधि के लिए आक्रामक फ़ील्डिंग भी सेट कर सकते हैं, क्योंकि आमतौर पर कुछ ओवरों का अंतिम परिणाम पर इतना बड़ा प्रभाव नहीं होता है।
यदि विपक्ष ऐसा करता है, तो यह ग़लती की गुंजाइश को कम करेगा। एक बाहरी किनारा जो उन्हें टी20 अंतर्राष्ट्रीय में डीप थर्ड क्षेत्र में सिंगल दिलाएगा वो यहां पहली स्लिप में लपक लिया जाएगा। ठीक ऐसा ही पिछले साल न्यूज़ीलैंड में हुआ था।
पहले वनडे में जब वह 33वें ओवर में बल्लेबाज़ी करने उतरे तब केन विलियमसन ने सीधे स्लिप लगा दी। लॉकी फ़र्ग्यूसन की पहली गेंद पर सूर्यकुमार ने चौका लगाया लेकिन दो गेंद बाद स्लिप में कैच दे बैठे। तीसरे वनडे में भी वह इसी तरह आउट हुए। अपने छोटे करियर में ऐसा उनके साथ बहुत कम बार हुआ है लेकिन उन्हें इससे सावधान रहने की ज़रूरत है।
एक और चुनौती यह पता लगाना है कि उन्हें कौन सा स्थान सबसे ज़्यादा पसंद है।
क्या वह चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करेंगे जहां उन्हें टी20 में सर्वाधिक सफलता मिली है? इस स्थान पर खेलते हुए वह मध्य ओवरों में केवल चार फ़ील्डरों के सीमा रेखा पर होने का लाभ उठा सकते हैं। या फिर क्या उन्हें पांचवें या छठे नंबर पर आना चाहिए जब पारी में 15 ओवर शेष हो। उस समय उनसे अपने शॉट खेलने की उम्मीद की जाएगी। उन्हें आज़ादी भी मिलेगी और विपक्ष अधिक समय के लिए आक्रामक फ़ील्डिंग नहीं लगा पाएगा। इसके बाद सूर्यकुमार पारी को टी20 की तरह देखते हुए खेल सकते हैं।
इन सभी बातों पर खरा उतरना आसान नहीं होगा लेकिन अगर कोई इस बात को भली-भांति जानता है, तो वह सूर्यकुमार ही हैं।

हेमंत बराड़ ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।