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सहवाग और लारा को गेंदबाज़ी करने में ख़ौफ़ था, सचिन को नहीं : मुरलीधरन

महान स्पिनर ने कहा कि सचिन 'दूसरा' सबसे अच्छा पढ़ते थे, लेकिन उनसे कभी डर नहीं लगा

Muttiah Muralitharan applauds while Virender Sehwag celebrates his century, India v Sri Lanka, 2nd Test, Kanpur, 1st day, November 24, 2009

शतकवीर सहवाग का ताली बजाकर अभिवादन करते हुए मुरलीधरन  •  AFP

विश्व के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज़ मुथैया मुरलीधरन का कहना है कि उन्हें उनके करियर में सबसे अधिक परेशान वीरेंद्र सहवाग और ब्रायन लारा ने किया है।
ESPNcricinfo के एक विशेष शो में सबसे कठिन बल्लेबाज़ का नाम पूछे जाने पर मुरलीधरन ने कहा, "मेरे सामने कई बल्लेबाज़ों ने शतक और दोहरे शतक लगाए हैं। वीरेंद्र सहवाग तो तिहरे शतक के करीब पहुंचे हैं। लेकिन यह उन बल्लेबाज़ों का दिन होता था, कभी ऐसा नहीं लगा कि वे परेशान कर रहे हैं। सच कहूं तो मुझे सबसे अधिक ब्रायन लारा और वीरेंद्र सहवाग ने ही परेशान किया है।"
सहवाग के बारे में पूछे जाने पर मुरली हंसते हुए कहते हैं, "वैसे तो मैं टेस्ट क्रिकेट में बॉउंड्री पर फ़ील्डर ही नहीं रखता था, लेकिन वीरेंद्र सहवाग के लिए ऐसा करना पड़ता था क्योंकि मुझे पता था कि वह चांस ज़रूर लेंगे और आक्रामक शॉट खेलेंगे।"
मुरलीधरन ने याद किया कि कैसे 2009 में उन्होंने सहवाग को 293 के स्कोर पर आउट किया था, जब वह अपने रिकॉर्ड तीसरे तिहरे शतक के क़रीब थे। मुरली बताते हैं दिन के अंतिम तीन-चार ओवर बचे थे और सहवाग ने तिलकरत्ने दिलशान की गेंद पर चौका मारकर 280 पार किया। वह उसी दिन तिहरा शतक पूरा कर लेना चाहते थे, लेकिन द्रविड़ ने उनसे कहा कि वह अभी विकेट बचाए रखें और अगले दिन तिहरे शतक के लिए जाए। अगले दिन जब सहवाग बल्लेबाज़ी के लिए आए तो मुंबई की तीसरी दिन की घूमती पिच पर उन्हें मुरली और रंगाना हेराथ ने बांधकर रख दिया। किसी तरह वह बिना बॉउंड्री के सहारे 293 तक पहुंचे, पर उन्हें मुरली ने अपनी ही गेंद पर लपक लिया।
मुरली कहते हैं कि सहवाग ऐसे ही थे। वह कब आउट हो जाएं यह किसी को नहीं पता रहता था। वह निर्भीक खिलाड़ी थे, जो 90 में होते हुए भी छक्का लगाते थे। "ऐसे खिलाड़ी विश्व स्तरीय होते हैं और इन खिलाड़ियों के सामने आपकी कोई योजना नहीं चलती," मुरली कहते हैं।
"जब वह बल्लेबाज़ी करने आते थे, तो हम डिफ़ेंसिव हो जाते थे और इंतज़ार करते थे कि कब वह ग़लती करें और कब हमें उनका विकेट मिले। लेकिन ग़लती करने से पहले वह सुनिश्चित कर लेते थे कि अगर उन्हें दो घंटे खेलने को मिल रहा है तो वह कम से कम 150 रन स्कोर करें और अगर उन्हें पूरे दिन का खेल मिलता था तो वह तिहरा शतक भी बना लेते थे।"
मुरलीधरन ने इस मौके पर 2001 के दौर को याद किया, जब वेस्टइंडीज़ श्रीलंका के दौरे पर तीन टेस्ट मैचों 3-0 से हारा था। वेस्टइंडीज़ के 60 विकेटों में 50 अकेले चामिंडा वास (26) और मुरलीधरन (24) की जोड़ी ने झटके थे। लेकिन इस ख़तरनाक फ़ॉर्म के दौर में भी वे ब्रायन लारा को परेशान नहीं कर पाए।
मुरलीधरन कहते हैं, "उस सीरीज़ में वेस्टइंडीज़ के सभी बल्लेबाज़ों को मैं बेहद आसानी से आउट कर पा रहा था। चामिंडा वास भी रिवर्स स्विंग के सहारे विकेट निकाल रहे थे। लेकिन लारा को तब भी आउट करना मुश्किल था। हमने लारा को आउट करने के लिए कई ट्रिक किए लेकिन कोई भी चाल कामयाब नहीं हुआ।"
इस सीरीज़ की छह पारियों में मुरली सिर्फ़ दो बार लारा को आउट कर पाए थे। इस दौरान लारा ने तीन शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 688 रन बनाए। यह तीन मैचों की सीरीज़ में किसी भी विदेशी बल्लेबाज़ द्वारा बनाए गए भी सर्वाधिक रन हैं। लारा ने इस सीरीज़ में एक दोहरा शतक (221 रन) भी लगाया था।
सचिन तेंदुलकर के बारे में पूछने पर मुरली ने कहा कि उन्हें गेंदबाज़ी करने में कोई डर नहीं लगता था क्योंकि वह आपके पीछे नहीं पड़ते थे और आपको चोट नहीं पहुंचाते थे। हालांकि मुरली ने माना कि सचिन को आउट करना बहुत कठिन होता था क्योंकि वह उनके सबसे प्रमुख अस्त्र दूसरा को विश्व में किसी भी खिलाड़ी की तुलना में सबसे बेहतर पढ़ते थे। इसके अलावा वह अपने विकेट का मूल्य समझते थे।
सचिन की एक कमज़ोरी के बारे में ध्यान दिलाते हुए मुरली ने कहा, "मुझे लगता है कि सचिन ऑफ़ स्पिन को उतने अच्छे से नहीं खेल पाते थे, जितना वह लेग स्पिन या लेफ़्ट आर्म स्पिन को खेल सकते थे। मैंने उन्हें कई बार आउट किया है। कई और ऑफ़ स्पिनर्स भी उन्हें आसानी से और सस्ते में आउट कर लेते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगता था कि वह ऑफ़ स्पिन के ख़िलाफ़ थोड़ा सा कमज़ोर थे। हालांकि मैंने कभी उनसे इस कमज़ोरी के बारे में बात नहीं की क्योंकि वह लीजेंड हैं।
आधुनिक बल्लेबाज़ों में मुरली का कहना है कि शायद विराट कोहली और बाबर आज़म उन्हें आसानी से खेल सकते हैं। कोहली के बारे में उन्होंने कहा, "मैंने कोहली के सामने (2011 विश्व कप) और साथ (आईपीएल) में खेला है। वह स्पिन को अच्छा और सीधे बल्ले से खेलते हैं। इसके अलावा बाबर को भी मैंने खेलते देखा है और वह भारतीय उपमहाद्वीप के भी हैं, तो मुझे लगता है कि ये दोनों बल्लेबाज़ मुझे अच्छा खेल सकते हैं।"
स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन के बारे में मुरली ने कहा कि ये बल्लेबाज़ स्पिन गेंदों को सीधे बल्ले से खेलने की बजाय स्वीप करना पसंद करते हैं। ऐसे में उनके आउट होने का ख़तरा भी बना रहता है। इसलिए मुरली को लगता है कि कोहली और आज़म स्पिन बेहतर खेलते हैं।

दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं। (dayasagar95)