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धवन की पारी ने उनकी वनडे में अहमियत बताई

धीमी विकेट पर 79 रन बनाकर उन्होंने दिखाया कि वह अभी भी दबाव में कामयाब हो सकते हैं

2020 से भारत के लिए वनडे में सबसे ज्‍यादा रन धवन ने बनाए हैं  •  AFP/Getty Images

2020 से भारत के लिए वनडे में सबसे ज्‍यादा रन धवन ने बनाए हैं  •  AFP/Getty Images

"चैंपियंस दबाव में फलते-फूलते हैं।" वेस्टइंडीज़ में अंडर-19 विश्व कप अभियान से पहले भारत के अंडर-19 क्रिकेटरों के लिए शिखर धवन का यही संदेश था। 2004 अंडर-19 विश्व कप में तीन शतक लगाने के बाद धवन जानते हैं कि वहां प्रदर्शन करने के लिए क्या करना पड़ता है। लेकिन वह उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल ख़ुद को प्रेरित करने के लिए भी कर सकते हैं।
36 साल की उम्र में धवन अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। पिछले साल जुलाई में उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ दूसरे दर्जे की भारतीय टीम का नेतृत्व किया और 2021 टी20 विश्व कप के लिए अपनी जगह को "मज़बूत" बनाने के लिए इस दौरे का उपयोग करने की उम्मीद की। धवन ने पिछले कुछ वर्षों में अपने टी20 खेल को आगे बढ़ाया है, लेकिन चयनकर्ताओं ने रोहित शर्मा, केएल राहुल और इशान किशन को टी20 विश्व कप के लिए अपने सलामी बल्लेबाज़ के रूप में पसंद किया।
धवन के बाहर होने के पीछे का एक कारण यह हो सकता था कि टी20 में शीर्ष तीन रोहित, धवन और विराट कोहली शीर्ष क्रम को बहुत भारी बना देते हैं। जब प्रमुख चयनकर्ता चेतन शर्मा से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। समय की जरूरत थी कि हम धवन को आराम देते हुए अन्य खिलाड़ियों को देखना चाहते थे।"
आप इसको जैसा समझना चाहें समझ सकते हैं, लेकिन हक़ीक़त यही है कि धवन अब केवल वनडे में ही जगह बना पाए हैं। लेकिन मौज़ूदा कप्तान राहुल की मानें तो धवन एक अच्छे समय के साथ साउथ अफ़्रीका सीरीज़ में आए हैं।
राहुल ने पहले वनडे से पहले कहा था, "वह एक वरिष्ठ खिलाड़ी हैं, वह ठीक-ठीक समझते हैं कि उनसे क्या उम्मीद की जाती है। वह वास्तव में अपने क्रिकेट का आनंद ले रहे हैं। एक कप्तान के रूप में मेरे लिए यह ज़रूरी है कि मैं उन्हें आत्मविश्वास दूं और स्वतंत्रता दूं। वह इतने सालों से ऐसा कर भी रहे हैं।"
पहले वनडे में धवन ने ठीक वैसा ही किया। धीमे विकेट पर 297 रनों का पीछा करते हुए, उन्होंने भारत को मैच में बनाए रखने के लिए 84 गेंद में 79 रन बनाए। साउथ अफ़्रीका ने आख़िर में एक बड़े अंतर से जीत हासिल की, लेकिन धवन की पारी ने एक बार फिर वनडे टीम में उनके महत्व को दर्शाया और दिखाया कि वह अभी भी दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
पिच स्पिनरों को मदद कर रही थी और गेंद बल्ले पर ठीक से नहीं आ रही थी। साउथ अफ़्रीका ने अपने पार्ट टाइम ऑफ़ स्पिनर एडन मारक्रम से गेंदबाज़ी की शुरुआत कराई। राहुल उन्हें सतर्कता के साथ खेल रहे थे, लेकिन धवन ने कदम आगे निकाले और मिडऑन के ऊपर से चौका लगा दिया।
दूसरे एंड पर उन्होंने मार्को यानसन को स्क्वायर बाउंड्री पर दोनों ओर चौके लगाए। जिसका मतलब था कि राहुल के 17 गेंद पर 12 रन बनाने के बावजूद भारत का स्कोरिंग रेट पांच रनों के क़रीब था। केशव महाराज 10वें ओवर में आए लेकिन उन्हें आते ही धवन को लेग साइड पर गेंद की, जिसको उन्होंने चौके के लिए भेज दिया। किस्मत भी साथ थी। पारी के दूसरे ओवर में वह यानसन की अंदर आती गेंद पर बच गए थे। गेंद बल्ले का अंदरूनी किनारा लेती हुई स्टंप्स के क़रीब से निकलकर चौके के लिए चली गई। बाद में जब वह 43 रन पर थे तो महाराज की एक फुलर गेंद को बैकफुट से खेलने के प्रयास में गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई थर्ड मैन पर बाउंड्री के लिए चली गई। हालांकि, वहां पर तब स्लिप तैनात नहीं था।
इसका मतलब यह था कि धवन ने बिना ज़्यादा रिस्क लिए 51 गेंद में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। कोहली के साथ उन्होंने दूसरे विकेट के लिए 102 गेंद में 92 रन जोड़े और भारत को मैच में बनाए रखा।लेकिन लक्ष्य अभी भी 159 रन दूर था। महाराज को एक गेंद पर ऑफ़ स्टंप के बाहर से काफी टर्न मिला, धवन कट की पॉज़िशन में आ गए थे और बोल्ड हो गए। कोहली भी इसके बाद जल्द आउट हो गए और साउथ अफ़्रीका ने मैच में अपनी पकड़ बना ली।
सीरीज़ से पहले धवन के टीम में स्थान को लेकर बातें चल रही थी। इसकी एक वजह यह भी हो सकती थी कि भारत को ज़्यादा वनडे नहीं खेलने हैं, जिससे उनके योगदान को भुलाना आसान हो सकता था। 2020 से धवन ने 60.54 के औसत और 91.98 के स्ट्राइक रेट से भारत की ओर से सबसे ज़्यादा 666 रन बनाए हैं।
एक कारण यह भी था कि वह विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी की ख़राब फ़ॉर्म से यहां पर आए थे। वह उस सीरीज़ में पांच पारियों में मात्र 56 रन ही बना सके थे। जबकि मौज़ूदा सीरीज़ में स्टैंडबाय ओपनर ऋतुराज गायकवाड़ ने विजय हज़ारे में इतनी ही पारियों में 603 रन बनाए, जिसमें चार शतक शामिल थे।
लेकिन धवन ने कहा कि यह उनके आत्मविश्वास और अपने खेल के बारे में स्पष्टता थी जिसने उन्हें पहले वनडे में अच्छा प्रदर्शन करने में मदद की। उन्होंने कहा, "बात [फ़ॉर्म के बारे में] हमेशा रहेगी। मुझे इसकी आदत है और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना जानता हूं। मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि मेरी तैयारी अच्छी हो। मैं जानता हूं कि अपने अनुभव और अपने आत्मविश्वास के साथ मैं अच्छा करूंगा और मुझे खुशी है कि मैंने आज अच्छा प्रदर्शन किया।"
"मुझे पता है कि मेरी क्षमता क्या है और मेरे पास किस प्रकार का खेल है। मुझे इसके बारे में बहुत स्पष्टता है। और मैं शांत रहता हूं। उतार-चढ़ाव हमेशा होते हैं, यह मेरे करियर में पहली बार या आख़िरी बार नहीं हो रहा है या मेरे जीवन में। यह केवल मुझे मज़बूत बनाता है।"

हेमंत बराड़ ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।