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यास्तिका का पदार्पण, पेरी की परेशानी : भारत-ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज़ से उभरे कई सवाल

दोनों पक्षों ने डेथ ओवरों में अपनी बल्लेबाज़ी में सुधार किया लेकिन फ़ील्डिंग की ग़लतियों से ग्रस्त थे

Yastika Bhatia acknowledges her fifty, Australia vs India, 3rd ODI, Mackay, September 26, 2021

यास्तिका भाटिया ने अपनी तीसरी ही वनडे पारी में अर्धशतक बनाया  •  Getty Images

भारत और ऑस्ट्रेलिया 2017 विश्व कप में फ़ाइनल और सेमिफ़ाइनल खेलने वाली टीमें हैं। कोविड महामारी के शुरू होने के बाद भारत ने 11 और ऑस्ट्रेलिया न नौ वनडे मैच खेले हैं। हाल ही में दोनों टीमों के बीच हुई तीन मैचों की श्रृंखला के बाद अगले साल होने वाले विश्व कप से पहले दोनों पक्षों के लिए कुछ सवाल ज़रूर खड़े हुए। आइए ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो पर उन सवालों का विश्लेषण करते हैं।
पारी के अंत में तेज़ गति से रन बनाने के मामले में दोनों टीमों ने बेहतर किया
दूसरे वनडे मैच में 275 के लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मेग लानिंग ने ब्रॉडकास्टर को बताया की उनकी टीम के बल्लेबाज़ आख़िर के 10 ओवर में नौ रन प्रति ओवर का रन रेट बरक़रार रखना चाहते थे। 2017 के बाद से 41वें और 50वें ओवर के बीच ऑस्ट्रेलिया की औसत रही है 7.24 की।
लेकिन बेथ मूनी, तालिया मैकग्रा और निकोला कैरी के चलते मेज़बान टीम ने आख़िरी 10 ओवरों में 88 रन जोड़े और फिर तीसरे वनडे में 73 रन।
भारत की हालिया आख़िरी ओवरों की रन गति काफ़ी साधारण रही है। इस साल इंग्लैंड ने 6.17 और साउथ अफ़्रीका ने 5.45 के रन रेट से आख़िर में बल्लेबाज़ी की है तो वही आंकड़ा भारत के लिए 5.55 है। इस सीरीज़ में भारत ने 61, 53 और अपनी इकलौती जीत में 68 रन डेथ ओवर्स में जोड़े। इस साल के टॉप दो टीमों से भले ही भारत पीछे रह गया हो उसने आख़िर के दो मैचों में छह रन प्रति ओवर के अपने बताए हुए लक्ष्य को पार किया। और आश्चर्य की बात नहीं कि इन्हीं दो मैचों में भारत ने 250 का आंकड़ा भी पार किया।
यास्तिका का पदार्पण और इससे उत्पन्न कुछ अहम सवाल
अपनी तीसरे ही वनडे पारी में 50 का आंकड़ा पार करने के दो गेंद बाद बाएं हाथ की बल्लेबाज़ यास्तिका भाटिया ने ऐनाबेल सदरलैंड की एक बैक ऑफ़ लेंथ गेंद को शफ़ल करके स्क्वेयर लेग की ओर चौके के लिए भेजा। 23 वर्षीय यास्तिका ने अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय सीरीज़ में अभ्यास मैच में 42 गेंदों पर 41 बनाने के बाद क्रमश: 34, 3 और 64 के स्कोर्स में आत्मविश्वास, धैर्य और परिपक्वता दर्शाई।
भारत के लिए इस वर्ष मध्यक्रम में निरंतरता के अभाव ने उन्हें परेशान कर दिया है। लेकिन भारत ने इंग्लैंड और घरेलू पिचों पर दो तेज़ गेंदबाज़ और तीन स्पिनर खिलाएं हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्पिन ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा और स्नेह राणा के अलावा उन्होंने तीन तेज़ गेंदबाज़ और निश्चित तौर पर एक स्पिनर को एकादश में रखा है। ऐसे में यास्तिका के प्रभावशाली डेब्यू से कुछ सवाल खड़े होते हैं।
विश्व कप और उससे पहले न्यूज़ीलैंड में होने वाली सीरीज़ में जब हरमनप्रीत कौर फ़िट हो जाती हैं तो उन्हें किसके स्थान पर टीम में लाया जाएगा? और अगर स्नेह और दीप्ति के योगदान को देखा जाए तो दोनों में से एक को भी ड्रॉप करने पर टीम के संतुलन पर क्या असर पड़ेगा?
पेरी की परेशानी
ऑस्ट्रेलिया के लिए मेगन शूट और टायला व्लेमिंक की ग़ैरमौजूदगी में नई गेंद की ज़िम्मेदारी एलिस पेरी को मिली। 2020 टी20 विश्व कप में हैमस्ट्रिंग में चोट लगने के बाद पहली बार पेरी नई गेंद संभाल रही थी। लेकिन नियंत्रण के आभाव के चलते उन्होंने एक भी विकेट नहीं लिया। साथ ही इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया ने 87 अतिरिक्त रन दिए जिनमें 67 वाइड में पेरी ने 26 रन वाइड के ज़रिये दिए। उनकी गेंदों में अच्छी गति थी और पहले वनडे में उन्होंने मिताली राज के हेलमेट पर भी गेंद दे मारी थी। लेकिन शेफ़ाली वर्मा और स्मृति मांधना की लेफ़्ट-राइट जोड़ी के ख़िलाफ़ उनकी दिशा भटकती नज़र आई। फलस्वरूप ऑस्ट्रेलिया पावरप्ले में दोनों छोर से भारत पर दबाव नहीं बना पाया।
बाक़ी तेज़ गेंदबाज़ों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। डार्सी ब्राउन, स्टेला कैंपबेल, हैना डार्लिंगटन और मैकग्रा ने लगातार अच्छी गेंदबाज़ी की। सदरलैंड ने भी आख़िरी वनडे में 30 रन देकर तीन विकेट झटके और अपनी छाप छोड़ी।
दोनों टीमों की फ़ील्डिंग में सुधार की सख़्त ज़रूरत
भारतीय महिलाओं ने इस वर्ष फ़ील्डिंग में हर तरह के प्रदर्शन किए हैं। चाहे वो इंग्लैंड में हरलीन देओल का अविश्वसनीय कैच हो या फिर आसान से मौक़ों को इस सीरीज़ में छोड़ना। शेफ़ाली अकसर यह दिखा देती हैं कि क्यों उन्हें मैदान पर छुपाने की ज़रूरत पड़ती है। ऋचा घोष ने बल्लेबाज़ी में ज़रूर इस टीम में एक नई ऊर्जा का संचार किया है लेकिन बतौर विकेटकीपर उन्होंने काफ़ी ग़लतियां की। दूसरे वनडे के निर्णायक आख़िरी ओवर में उन्होंने ओवरथ्रो पर एक रन विपक्ष को दिया और अगले मुक़ाबले में एक आसान कैच छोड़ा। कुल मिलकर आख़िर के दो मैचों में भारत ने सात कैच टपकाए।
ऐसा नहीं था कि फ़ील्डिंग के मामले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को अकेला छोड़ा। आख़िरी मुक़ाबले में कैरी, सदरलैंड और मोलिन्यू सब ने फ़ील्डिंग में ग़लतियां की और कप्तान लानिंग ने स्लिप पर एक आसान कैच छोड़ा।
तो विजयरथ पर सवार विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम ने दर्शाया कि उनमें भी कहीं सुधार की ज़रूरत रह गई है।
आंकड़े संपत बंडारुपल्ली द्वारा

ऑन्नेशा घोष (@ghosh_annesha) ESPNcricinfo में सब ए़डिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर असेस्टिंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।