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केकेआर के ख़िलाफ़ 'सर' जाडेजा ने दिखाया अपना जादू

नाइट राइडर्स ने मिस्ट्री स्पिनरों के ख़िलाफ़ धोनी की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया लेकिन वह जाडेजा को नहीं रोक पाए

दो सीज़न में तीसरी बार ऐसा देखने को मिला हैं कि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के ख़िलाफ़ मिस्ट्री स्पिनर्स का महेंद्र सिंह धोनी पर दबदबा होने का फ़ायदा उठाया। अबू धाबी में ही पिछले साल 168 के लक्ष्य का बचाव करते हुए केकेआर ने अपने ऐसे स्पिनर धोनी के क्रीज़ पर आने तक रोके। वरुण चक्रवर्ती और सुनील नारायण ने उन्हें 12 गेंदों पर 11 रन तक सीमित रखा और फिर केदार जाधव बल्लेबाज़ी करने आए। आख़िर में रवींद्र जाडेजा ने नाबाद 21 ज़रूर मारे लेकिन टीम 10 रनों से मैच हार गई।
दुबई में खेलते हुए कुछ ऐसा ही हुआ। सीएसके को 173 रनों की ज़रूरत पड़ी और इस बार धोनी चार गेंद खेलकर हुए वरुण का शिकार। लेकिन इस बार ऋतुराज गायकवाड़ ने रन रेट को बरक़रार रखा और जाडेजा फिर 18वे ओवर में बल्लेबाज़ी करने आए। जब दो ओवर में 30 रन चाहिए थे, उन्होंने 11 गेंदों पर 31 रन लूटे, और लॉकी फ़र्ग्युसन की जमकर धुनाई की। इस मैच से केकेआर के प्लेऑफ़ के सपने भी तितर-बितर हो गए और साथ ही चेन्नई के लिए एक साधारण सत्र में 'फ़िनिशर' जाडेजा सामने आते दिखे।
रविवार को साफ़ हो गया कि इस रोल को जाडेजा ने भरपूर तरीक़े से अपना लिया है। एक बार फिर धोनी बनाम वरुण में जीत केकेआर के गेंदबाज़ की रही। उसी ओवर में रैना भी रनआउट हुए और ऐसा लगा कि चेन्नई ने जाडेजा के लिए पहाड़ तोड़ने का काम छोड़ दिया है। लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा के 19वें ओवर में अंतिम चार गेंदों पर 20 रन लेकर जाडेजा ने मैच को पूरी तरह से बदल दिया।
चेन्नई बोलिंग कोच लक्ष्मीपति बालाजी ने मैच के बाद कहा, "ठीक एक साल पहले जाडेजा ने हमें दुबई में आख़िरी ओवर में जाकर मैच जिताया था। जब वह खेलते हैं तो हमें हौसला रहता है कि वो कोई जादू कर सकते हैं। वो दबाव में बहुत अच्छी बल्लेबाज़ी करते हैं और अपनी टीम की जीत सुनिश्चित करते हैं। उनकी बल्लेबाज़ी में पिछले दो सालों में बहुत निखार आया है।"
पिछले साल के दोनों मुक़ाबलों में सैम करन को जाडेजा से पहले भेजा गया था। नीति साफ़ है - जाडेजा से उम्मीद यही रहती है कि वह पारी को संभालने या बुनियाद बसाने की जगह सिर्फ़ छक्कों और चौकों में रन की वृद्धी करवाएं। यह 'जादू' है बस दो या तीन ओवर में मैच बदलने की कला। हालांकि यह ख़तरनाक भी साबित हो सकता है।
मैच के बाद ख़ुद धोनी ने कहा, "क्रिकेट में अगर आप अच्छा नहीं खेलें और फिर भी जीत जाएं तो ज़रूर मज़ा बहुत आता है।" लेकिन डगआउट में जाडेजा को लेकर विश्वास काफ़ी मज़बूत था।
बालाजी ने कहा, "हमें पता था कि आख़िरी गेंद तक इस मैच का फ़ैसला नहीं होगा। एक दो परेशानियां ज़रूर पैदा हुईं लेकिन अनुभव के साथ आप उन दबाव वाली स्थितयों में भी अच्छा खेल दिखाकर जीत सकते हैं।"
इस जीत के साथ सीएसके एक बार फिर अंक तालिका के शीर्ष पर पहुंच गया। पिछले सीज़न के मुक़ाबले यह कहानी बिलकुल पलट गई है। इसका मुख्य कारण है टीम में ऑलराउंडर्स की भरमार। अच्छी गेंदबाज़ी करने के बाद शार्दुल ठाकुर और दीपक चाहर क़ीमती रन भी जोड़ लेते हैं। करन, ड्वेन ब्रावो और मोईन अली भी हरफ़नमौला खिलाड़ियों में शुमार हैं। लेकिन इन सब में सबसे घातक साबित होते हैं जाडेजा। रविवार को ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो स्मार्ट स्टैट्स के अनुसार उनका पूर्ण इम्पैक्ट रहा 81.56, ठाकुर के 76.15 से कहीं ज़्यादा। राहुल त्रिपाठी को आउट करते हुए चार ओवर में सिर्फ़ 21 रन देना उस इम्पैक्ट का हिस्सा था।
बालाजी ने कहा, "उनकी गेंदबाज़ी भी काफ़ी सुधर चुकी हैं। वो दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को बराबरी से परेशान कर लेते हैं। वो बल्लेबाज़ों को आसानी से रन नहीं देते। पिछले मैच में भी बेंगलुरु के विरुद्ध उन्होंने एक छोटे मैदान की सपाट पिच पर बल्लेबाज़ों को बांध रखा था। इससे तेज़ गेंदबाज़ों को फ़ायदा मिला।"
टी20 विश्व कप से पूर्व भारत हार्दिक पंड्या की फ़िटनेस और बल्लेबाज़ों के फ़ॉर्म को लेकर काफ़ी चिंतित है। ऐसे में रवींद्र जाडेजा कई सवालों के जवाब का रूप ले सकते हैं।

वरुण शेट्टी ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर असेस्टिंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।