फ़ीचर्स

चेतेश्वर पुजारा : 'मेरा जुनून मेरा पेशा बन गया'

अपने 100वें टेस्ट से पहले भारतीय बल्लेबाज़ ने इस यादगार सफ़र के बारे में बात की

Cheteshwar Pujara looks on, Somerset vs Sussex, Royal London One-Day Cup, Cooper Associates County Ground, Taunton, August 19, 2022

"जब तक मैं क्रीज़ पर हूं, मैं टीम को मैच जिता सकता हूं"  •  Getty Images

एक दर्ज़न भारतीय खिलाड़ियों ने 100 से अधिक टेस्ट खेले हैं। अगर चेतेश्वर पुजारा ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी का दूसरा टेस्ट खेलते हैं तो वह भी 100 टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ियों के क्लब में शामिल हो जाएंगे। पुजारा ने 13 साल पहले टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उनके खेलने की शैली को लेकर कई बार सवाल भी उठे लेकिन इन सभी बाधाओं को पार करते हुए, वह आज भी टेस्ट क्रिकेट में जमे हुए हैं।
अपने विश्वासों के प्रति ईमानदार, अनुशासित रहकर और धार्मिक रूप से अपनी दिनचर्या को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने एक ऐसा करियर बनाया है, जिसके कारण उन्हें इस युग के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिना जाता है। ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ की शुरुआत से पहले ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के साथ हुई बातचीत में, पुजारा ने अपनी यात्रा के बारे में बताया।
क्या यह आपके लिए एक स्पेशल टेस्ट मैच होने वाला है? क्या आप गौरवान्वित महसूस करते हैं?
जब आप रन बना रहे होते हैं या जब आप 50 या 100 रन बनाते हैं तो एक ख़ास एहसास होता है और यह ठीक वैसा है। जब आप शतक बनाते हैं तो आप उस पल का लुत्फ़ उठाते हैं लेकिन फिर भी आप आगे बढ़ाते रहते हैं। कोई भी मुक़ाम हासिल करने के बाद संतुष्टि मिलती है, लेकिन आप हमेशा अपनी भूमिका को निभाने का प्रयास करते हैं।
यह मेरा 100वां टेस्ट मैच होगा लेकिन आपको टीम के लिए काम करना है और आप उस पर ध्यान देते रहते हैं। यह बल्लेबाज़ी की ही तरह है : जब आप शतक तक पहुंचते हैं, तो आप फिर से शुरू करते हैं। कभी-कभी आप दोहरा शतक बनाना चाहते हैं। आप भले ही 200 टेस्ट मैच नहीं खेल सकते हैं लेकिन आप अपने अगले लक्ष्य की तरफ़ बढ़ते चले जाते हैं।
हम ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अहम सीरीज़ खेल रहे हैं। दूसरा टेस्ट मेरा 100वां मैच होगा, लेकिन उसके बाद दो और टेस्ट होंगे। डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई करने के लिए हमारा जीतना बहुत महत्वपूर्ण है।
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच और सीरीज़ हमेशा से आपके करियर में अहम रहे हैं। उन्हीं के ख़िलाफ़ आपने 2010 में बेंगलुरु में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। क्या आपको उस दिन के बारे में कुछ क्या याद है?
ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मैंने उस मैच का सबसे अधिक लुत्फ़ उठाया था। मुझे आज भी याद है कि जब मुझे डेब्यू कैप सौंपी गई थी। वह एहसास, वह दबाव का क्षण सब कुछ याद है। ऐसे पलों में एक युवा के रूप में आप चिंतित होते हैं। आप घबराए हुए रहते हैं। पहली बार भारतीय टीम के लिए खेलने का एहसास आप कभी नहीं भूल सकते। उसके बाद भी अपना पहला विदेशी टेस्ट मैच खेलते हुए, आप जिस तरह के दबाव से गुज़रते हैं, आप समझ जाते हैं कि विदेशी परिस्थितियों में सफल होने के लिए आपको अपनी टीम पर काम करने की ज़रूरत है।
मैंने अब एक दशक से अधिक समय तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल लिया है। ऐसे दौर में आपको काफ़ी कुछ सीखने को मिलता है : आपके चरित्र में, आपके स्वभाव में, आपके धैर्य में, एक व्यक्ति के रूप में आपकी परीक्षा होती है। यह खेल सिर्फ़ इस बारे में नहीं है कि आप मैदान पर क्या करते हैं, यह इस बारे में भी है कि आप मैदान के बाहर कैसा व्यवहार करते हैं। इससे आपके मैदान पर किया गया प्रदर्शन भी प्रभावित होता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि आप टेस्ट क्रिकेट में पर्याप्त अनुशासित नहीं हैं, तो आपको मैदान पर इसका प्रभाव दिख जाएगा। इसलिए टेस्ट क्रिकेट ख़ास है। हां, टी20 क्रिकेट अब ज़्यादा लोकप्रिय हो गया है लेकिन अगर आप किसी टेस्ट क्रिकेटर से बात करें तो वह आपको बताएगा कि एक सफल टेस्ट खिलाड़ी बनने में काफ़ी मेहनत लगती है।
आप केवल एक ही प्रारूप खेलते हैं और उसमें उत्कृष्टता प्राप्त करने की आपकी इच्छा हमेशा की तरह प्रबल है। आगे बढ़ते रहने के लिए आपको सबसे ज़्यादा क्या प्रेरित करता है?
सबसे पहले तो इस खेल के प्रति जो प्यार है, वह अहम है। मेरा जुनून मेरा पेशा बन गया है। मैंने कभी क्रिकेट खेलने के अलावा और कुछ करने का सपना नहीं देखा था। मुझे अच्छा करने के लिए किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत नहीं है। और यह सिर्फ़ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के बारे में नहीं है। अगर आप क्लब, राज्य, काउंटी, देश जैसे किसी भी स्तर के मैचों में मेरे प्रदर्शन को देखें तो कोई भी मेरी प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठा सकता। मुझे हारने से नफ़रत है।
जब आप भारतीय टीम के लिए खेल रहे होते हैं तो आपको उस प्रेरणा की ज़रूरत नहीं होती। यह भीतर से आता है। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं और सर्वश्रेष्ठ हासिल करने की कोशिश करना चाहता हूं।
संयम हमेशा से आपके खेल की पहचान रहा है। पाकिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ मोहम्मद रिज़वान, जो पिछले साल आपकी ससेक्स टीम के साथी थे, उन्होंने कहा कि उन्होंने आपसे बेहतर एकाग्रता के साथ खेलते हुए कभी किसी को नहीं देखा। इसका क्या राज़ है?
यह इस बारे में है कि आप एक व्यक्ति के रूप में कैसे हैं, आपकी यात्रा कैसी रही है। मैं बहुत सादा जीवन जीता हूं और यही कारण है कि मैं बहुत सी चीज़ों से विचलित नहीं होता हूं। साथ ही, मैं ईश्वर में विश्वास करता हूं और यह एक ऐसी ताक़त है, जो मुझे बहुत सकारात्मकता देती है। कई बार आपके बारे में बहुत सी बातें कही जाती हैं। कभी-कभी लोग आपके बारे में नकारात्मक बातें करेंगे या आपकी आलोचना करेंगे, लेकिन सकारात्मक रहना महत्वपूर्ण है। इसलिए मुझे लगता है कि जब आप किसी महाशक्ति में विश्वास करते हैं तो आपको ताक़त मिलती है।
योगा ने पिछले कई वर्षों में मेरी बहुत मदद की है और मैं इसे नियमित रूप से कर रहा हूं। इससे मुझे अपनी एकाग्रता में सुधार करने में भी मदद मिली है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आप अपने आस-पास की चीज़ों को भूल जाते हैं, तो आप अपना ध्यान किसी ख़ास चीज़ पर केंद्रित कर सकते हैं। जब मैं बल्लेबाज़ी कर रहा होता हूं, तो मैं अपना दिमाग़ खाली रखता हूं। मैं सिर्फ़ उस पर ध्यान केंद्रित करता हूं जो मुझे करना है। और ऐसा करने के लिए आपको यह भी भूलना होगा कि गेंदबाज़ क्या करेगा, क्योंकि क्रिकेट में आपको वर्तमान में रहना होता है, आपको गेंद को देखना होता है और अपनी सहज प्रवृत्ति का पालन करना होता है। इसके लिए आपको अच्छी तरह से तैयार होने की ज़रूरत है, आपको यह जानने की ज़रूरत है कि आप किसका सामना करने जा रहे हैं। यह केवल मैदान पर एकाग्र रहने से संबंधित नहीं है। आपने पहले जो कुछ भी किया है उसका संयोजन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मुझे लगता है कि आप अपने फ़ोन पर ज्यादा समय नहीं बिताते हैं?
(वह हंसते हैं) नहीं, मैं फ़ोन का प्रयोग ज़्यादा नहीं करता। दोस्तों और परिवार से बात करने के अलावा मैं ज़्यादा कुछ नहीं करता। इसके अलावा मैं सोशल मीडिया से बचने की कोशिश करता हूं। एक खिलाड़ी के तौर पर आपको सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की ज़रूरत है लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। यहां तक कि जब कोई मेरे बारे में सोशल मीडिया पर बात करता है, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, मैं दूर रहता हूं। क्योंकि मैं अपने तरीके़ को जानता हूं, मैं अपनी दिनचर्या जानता हूं, मुझे पता है कि सफल होने के लिए मुझे क्या करना है। जब आप समय के साथ ऐसा कर लेते हैं, तो आपको एक रास्ता मिल जाता है और आप उस पर टिके रहते हैं।
आपने हमेशा घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेते हैं। आपके करियर में घरेलू क्रिकेट ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई है?
निश्चित रूप से घरेलू क्रिकेट ने मेरे करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर मैं कुछ साल पीछे मुड़कर देखता हूं, जब कोविड-19 चारों ओर फैला हुआ था, तो उस समय मुझे अपनी लय प्राप्त करने में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। मुझे लगता है कि आप नेट्स में कितना भी समय क्यों न बिताएं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और ख़ासकर टेस्ट प्रारूप में सफल होने के लिए प्रथम श्रेणी मैच खेलना बहुत ज़रूरी है। आपको तैयारी करने के लिए, उस लय को तलाशने के लिए, अपनी एकाग्रता खोजने के लिए, यहां तक कि अपने पैरों को हिलाने के लिए भी पिच पर समय बिताने की आवश्यकता है।
क्या आप भारत के लिए सिर्फ सफे़द गेंद क्रिकेट खेलने वाले युवा खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने की सलाह देंगे?
हां। यदि आप सिर्फ़ सफे़द गेंद का क्रिकेट खेल रहे हैं और यदि आपका लक्ष्य टेस्ट क्रिकेट खेलना है, तो आपको रणजी ट्रॉफ़ी ज़रूर खेलनी चाहिए। अन्यथा आप अंतत: रेड-बॉल क्रिकेट में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेनक़ाब हो जाएंगे। अगर आप उन खिलाड़ियों को देखें जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है, तो उन्होंने लाल गेंद से कुछ क्रिकेट खेला होगा - चाहे वह रणजी ट्रॉफ़ी हो, दलीप ट्रॉफ़ी हो या इंडिया ए, रेस्ट ऑफ़ इंडिया के लिए। गेंदबाज़ों के लिए यह थोड़ा अलग है, लेकिन एक बल्लेबाज़ के लिए लाल गेंद से क्रिकेट खेलना ज़रूरी है।
आपकी सबसे प्रिय पारी कौन सी है?
मेरी शीर्ष पारियों में टेस्ट पदार्पण पर 72 रनों की पारी हमेशा शामिल रहेगी। इसके बाद 2013 में साउथ अफ़्रीका में मेरा पहला शतक, जहां मैंने 153 रनों की पारी खेली थी।
2010 (मेरी पहली विदेशी श्रृंखला) मेरे लिए कठिन समय था। मैंने नंबर 5 या 6 पर बल्लेबाज़ी की थी। डेल स्टेन और मॉर्ने मोर्कल अपने चरम पर थे। मुझे अभी भी याद है, मैंने राहुल भाई (द्रविड़) से बात की थी कि मुझे यह मुश्किल लग रहा है क्योंकि मैंने हमेशा भारतीय पिचों पर खेला है, जहां उछाल कम और गति धीमी होती है। इसके अलावा साउथ अफ़्रीका में मुझे मौसम के प्रति अनुकुलित होने में दिक़्क़त हो रही थी और यह एकदम अलग चुनौती का सामना करने जैसा था। उन्होंने मुझे कई अच्छी सलाह दी थी। मैंने इस पर काम किया। मैंने सुनिश्चित किया कि जब भी मैं अगली बार साउथ अफ़्रीका आऊं तो मैं अच्छा प्रदर्शन करूं, जिसमें मैं सफल रहा।
2017 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बेंगलुरु में एक और पारी मुझे याद रहेगी। मैंने कई बार कहा है कि कभी-कभी आपके अर्धशतक आपके कुछ शतकों से अधिक मूल्यवान होते हैं। और यह उन पारियों में से एक थी जिसने न सिर्फ़ उस टेस्ट मैच बल्कि पूरी टेस्ट सीरीज़ का फैसला किया। अगर हम वह मैच हार गए होते, तो श्रृंखला दांव पर थी। इसलिए यह पारी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से और टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।
2018 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एडिलेड में 123 रनों की पारी। यह एक महत्वपूर्ण श्रृंखला की पहली पारी थी। मैंने अपना होमवर्क किया था और मुझे इसके परिणाम भी मिले। मैं वास्तव में इससे बहुत खु़श था।
2020-21 श्रृंखला में गाबा में अर्धशतक - जहां मुझे अपने शरीर पर कई बार चोटें आईं और इससे मुझे अपना रास्ता निकालना पड़ा। मुझे लगा कि टीम के नज़रिए से यह एक महत्वपूर्ण पारी थी।
आप अभी 35 वर्ष के हुए हैं। यह एक ऐसी उम्र है जब इस बारे में चर्चाएं शुरू हो जाती है कि एक खिलाड़ी और कितने दिनों तक खेल सकता है। जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड, जो दोनों केवल टेस्ट खेलते हैं, उन्होंने दिखाया है कि कौशल कभी नीचे नहीं जाता। एक बल्लेबाज़ के रूप में इसके बारे में क्या सोचते हैं?
मैं अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करना चाहता। मैं वर्तमान में रहना चाहता हूं। मैं इन सब चीज़ों के बारे में सोचने की बजाय एक बार में एक टेस्ट मैच के बारे में सोचना चाहता हूं। खेल का आनंद लेना महत्वपूर्ण है, अपने खेल में शीर्ष पर होना महत्वपूर्ण है, और जब भी आप योगदान देने में सक्षम नहीं होते हैं, या आप अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, तो आप अगले क़दम पर विचार कर सकते हैं। मैं अभी 35 साल का हुआ हूं। अभी थोड़ा वक़्त है।
जब मैं पहली बार चोटिल हुआ था (2009 में दाएं घुटने की सर्जरी) तो मुझे नहीं पता था कि मैं कब तक खेलूंगा। मैंने अपना बाएं एसीएल का इलाज करवाया और फिर 2011 में दूसरे लिगामेंट का इलाज करवाया। मुझे वास्तव में इस चोट का कोई अंदाज़ा नहीं था। इससे पहले मुझे कभी कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी, इसलिए मैं सदमे में था। मैं नहीं जानता था कि मैं खेलना जारी रख पाऊंगा या नहीं। इसलिए तब से जो कुछ भी हुआ है, वह बोनस रहा है। उस समय मैं रिहैब और सर्जरी से परिचित नहीं था। मैं एक तरह से सदमे में था और मुझे नहीं पता था कि मुझे क्या करना है। मुझे बताया गया था कि मैं छह महीने के लिए खेल से बाहर हो जाऊंगा। 2011 में मेरे घुटने में दूसरी चोट लगने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने शरीर की देखभाल करने की ज़रूरत है, और तब से मैं अपनी फ़िटनेस पर बहुत ध्यान दे रहा हूं।
यह कहना शायद सही होगा कि आप तब तक खेलेंगे जब तक आपको विश्वास है कि आप मैच विजेता बनने में सक्षम हैं। लेकिन क्या यह भी आपका लक्ष्य है कि आप रिटायर होने से पहले 50 की औसत सुनिश्चित करें?
मैं ऐसा कोई लक्ष्य अपने लिए निर्धारित नहीं करूंगा। एक क्रिकेटर के तौर पर आप हमेशा अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं और अधिक से अधिक रन बनाना चाहते हैं। यह प्रत्येक टेस्ट मैच में रन बनाने के बारे में है। और जब मैं रन बनाऊंगा तो औसत ऊपर जाएगी। मेरा उद्देश्य और लक्ष्य निश्चित रूप से रन बनाना है। औसत के बारे में मैं नहीं सोचता क्योंकि यह एक उप-उत्पाद है।
क्या आपका परिवार 100वें टेस्ट में शामिल होगा?
हां, वे उस मैच में ज़रूर शामिल होंगे। मेरे पिता मेरे प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्होंने मुझे तब कोचिंग देना शुरू किया जब मैं आठ साल का था। इसलिए उनके लिए भी यह एक लंबी यात्रा रही है। मुझे उस समय के दौरान खेलते हुए देखना, एक कोच के रूप में मेरा मार्गदर्शन करना। मैं उनका बहुत शुक्रगुज़ार हूं और उनके लिए भी अपने बेटे को 100वां टेस्ट खेलते देखना गर्व का क्षण है। और वह बहुत ही भावुक व्यक्ति हैं, इसलिए उनके लिए यह बहुत बड़ा क्षण होगा।
साथ ही मैं जल्द ही अपनी शादी की 10वीं सालगिरह भी पूरी करूंगा। मेरी पत्नी ने भी काफ़ी उतार-चढ़ाव देखे हैं और वह हमेशा मेरे साथ रही हैं। जब हमारी सगाई हुई थी, उसे क्रिकेट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह लगभग आठ या नौ साल से खेल का अनुसरण कर रही है। इसलिए वह खेल को समझती है, वह समझती है कि मेरी दिनचर्या ऐसी क्यों है। कभी-कभी वह मुझसे कहती है कि किसी और चीज़ की चिंता करने की बजाय बेहतर होगा कि आप यह सुनिश्चित कर लें कि आप अपना जिम सत्र पूरा कर रहे हैं। उसने सब कुछ अच्छी तरह से प्रबंधित किया है, न केवल घर के मोर्चे पर, बल्कि एक क्रिकेटर के जीवन में बहुत सी चीज़ें हैं, जिसमें विज्ञापन भी शामिल हैं। इसलिए मैं आराम कर सकता हूं और अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकता हूं।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo में न्यूज़ एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।