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भारत की बल्लेबाजी क्रम के पहेली में जगह-जगह फे़रबदल

कोहली का शफ़ल करना बताता है कि भारतीय बल्‍लेबाज़ नया दृष्टिकोण अपना रहे हैं

भारत ने अपने बल्लेबाज़ी के दौरान कुल 25 चौके और 13 छक्के लगाए। यह लेकिन यह दो तरह से महत्वपूर्ण था।
पहला, इस आक्रामक बल्लेबाज़ी के कारण भारत 190 के स्‍कोर से आगे निकल गया। इस साल 21 पारियों में 10वीं बार ऐसा हुआ जब भारतीय टीम ने पहली बल्‍लेबाज़ी करते हुए यह कारनामा किया। जबकि 2020 और 2021 मेंं भारत पहले बल्‍लेबाज़ी करते हुए 16 बार में केवल तीन बार ही 190 रनों के स्‍कोर तक पहुंच पाया था।
पहले बल्‍लेबाज़ी करते हुए बडे़ स्‍कोर बनाने में भारत ने बढ़िया सुधार किया है। आप कह सकते हैं कि यह बदलाव इसी वजह से आया है कि टीम कोई भी स्‍कोर सुरक्षित नहीं समझ रही है और वह ना ही लक्ष्‍य का पीछा करते हुए विरोधी टीमों को टी20 क्रिकेट का आनंद उठाने देना चाहती हैं। रविवार को भारत ने तीन विकेट पर 237, टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय में अपना चौथा सर्वश्रेष्‍ठ स्‍कोर बनाया और तब भी साउथ अफ़्रीका ने एक बार को भारतीय टीम को डरा दिया था।
दूसरा कारण यह है कि बड़े शॉट किसने और कैसे खेला है। बड़े स्कोर की नींव रखने में यह एक बड़ा कारण रहा है।
विराट कोहली वेन पार्नेल के सामने स्‍ट्राइक पर थे। इससे पहले कि पार्नेल गेंद हाथ से छोड़ते, कोहली तीनों स्‍टंप्‍स को छोड़कर ऑफ़ स्‍टंप के काफ़ी बाहर आ गए। पार्नेल ने कोहली का पीछा किया, ताकि कोहली जहां गेंद को मारना चाहते हैं उन्‍हें मौक़ा नहीं मिल पाए, लेकिन कोहली लेग साइड में गैप को देख रहे थे, गेंद फुल टॉस आई और कोहली ने स्‍क्‍वेयर लेग पर चौका जड़ दिया।
टी20 क्रिकेट में बल्लेबाज़ों का अपनी क्रीज़ पर घूमना कोई असामान्य बात नहीं है और यह भारत की पारी का 17वां ओवर था, लेकिन कोहली आक्रामकता के चरम पर होने के बाद भी इस तरह से शफ़ल नहीं करते हैं।
कोहली अपनी पारी की शुरुआत में भी तेज़ गेंदबाज़ों पर आक्रमण नहीं करते हैं। उन्‍होंने जुलाई में ट्रेंटब्रिज में इसको दोहराया लेकिन वे पारियां छोटी थीं।
यह कोई आसान दृष्टिकोण नहीं है जिसमें आसानी से ढला जा सके। इसमें समय लगता है और यह सुरक्षा चाहता है कि आपको वहां पर खड़े रहना है। पिछले कुछ महीनों में भारत के लगभग सभी बल्लेबाज़ों ने इस दृष्टिकोण के साथ अपने व्यक्तिगत कौशल से सामंजस्‍य बैठाने के तरीक़े ख़ोज लिए हैं।
यह हमेशा काम नहीं करता है। इस दृष्टिकोण के प्रेरक रहे रोहित शर्मा रविवार की रात लय से बहुत दूर थे, अक्सर केशव महाराज द्वारा बंधे पाए जाने से पहले वह क्षेत्ररक्षकों के पास गेंद को मारते थे। महाराज ने एक असाधारण 4-0-23-2 का स्‍पेल फ़ेंका जब भारत ने तीन विकेट पर 237 रन बनाए।
लेकिन तब भी रोहित 116.21 के स्‍ट्राइक रेट तक ही पहुंच पाए। ऐसा नहीं था कि उन्‍होंने कोशिश नहीं की। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के डाटा के अनुसार, उन्‍होंने 37 में से 14 गेंदों पर आक्रमण किया, जो लगभग 38 प्रतिशत था, जो केएल राहुल से बड़ा प्रतिशत था। राहुल ने 27 में से नौ बार ऐसा किया 32 प्रतिशत के साथ। यह उन दिनों में से एक था जब ओपनर बॉल को टाइम करने में जूझ रहे थे और जबकि दूसरों के आसानी से गेंद बल्‍ले पर आ ही थी।
रोहित ने मैच के बाद पुरस्‍कार वितरण समारोह में बल्‍लेबाज़ी दृष्टिकोण के सवाल पर कहा, "यह कुछ ऐसा है कि हम सब एकजुट हो गए हैं और हमने कहा था, आप जानते हो यही वह है जो हम एक टीम के तौर पर करना चाहते हैं। कई बार यह निकलकर आएगा और कई बार ऐसा नहीं होगा लेकिन हमें इसी पर लगे रहना है। हमें लगा था कि आगे बढ़ने का यही तरीक़ा है, इससे हमें परिणाम मिले हैं और हम इस दृष्टिकोण को बनाए रखेंगे।"
इस तरह के दृष्टिकोण को अपनाने के लिए बेशक आपके पास ख़ास खिलाड़ी होने चाहिए और भारत के पास ऐसे एक से ज्‍़यादा है। राहुल उनमें से एक हैं और जबकि उनकी शॉट-मेकिंग क्षमता कभी-कभी उनकी टी20 पारी के शुरुआती हिस्सों में अस्पष्ट रूप से निष्क्रिय हो सकती है, यह मैच की पहली गेंद से ही सबूत में था, जब उन्होंने कगिसो रबाडा को बैक फ़ुट से प्‍वाइंट के पीछे से पंच किया।
अगस्‍त में चोटिल होने के बाद वह रिदम पाने की कोशिश कर रहे हैं और बुधवार को उन्‍होंने तिरुवनंतपुरम की धीमी पिच पर रनों से अधिक गेंद खेलकर अर्धशतक लगाया। लेकिन रबाडा पर बैकफ़ुट पंच उनके अंदर एक स्विच करता दिख रहा था। आप जानते हैं कि राहुल उस शॉट को खेलते समय दुर्लभ और लगभग अनसुने स्पर्श में होते हैं, और जब वह अपने पैड से आसानी से छक्के लगाते हैं, जैसा कि उन्होंने इस पारी में दो बार किया था।
यह एक बेहतरीन पारी थी, लेकिन वह बात अलग है कि सूर्यकुमार यादव एक क़दम आगे निकल गए। सूर्यकुमार ऐसी लय में हैं जहां वह किसी भी लाइन और लेंथ की गेंद पर कहीं भी बाउंड्री निकाल सकते हैं।
गुवाहाटी में उनकी 22 गेंदों में 61 रन की पारी ने उनके खेल के एक और पहलू को उजागर किया।
तिरुवनंतपुरम में अर्धशतक के दौरान सूर्यकुमार कैची के अनुसार ट्रिगर मूवमेंट अपनाए थे, ओपन स्‍टांस से रिलीज़ के समय साइड ऑन पॉज़‍िशन, जहां फ़्रंटफ़ुट ऑफ साइड पर जाता था और बैकफ़ुट लेग साइड पर जाता था। रविवार को उन्‍होंने बिल्‍कुल अलग ट्रिगर मूवमेंट अपनाया। उन्‍होंने उसी पॉज़‍िशन से शुरुुआत की और अंत और अधिक ओपन होकर किया, जहां उनका बैकफ़ुट पीछे जाता और अगला पैर वहीं रहता।
सूर्यकुमार को इन तक़नीकी समायोजनों के बारे में बात करते हुए सुनना बेहद शानदार होगा। हम जो जानते हैं वह यह है कि वह दोनों सेट-अप के साथ उतने ही सहज़ दिखते थे, और क्षेत्र के हर हिस्से तक गेंद को भेजने में उतने ही सक्षम थे।
अब आते हैं दिनेश कार्तिक पर जो तब आए जब दो ओवर से भी कम बचे थे और सात गेंद में नाबाद 17 रन बनाकर लौटे। उन्‍होंने अपना पहला अंतर्राष्‍ट्रीय मैच 2004 में खेला था, लेकिन वह शायद भारत के सबसे भविष्यवादी क्रिकेटर है, उस तरह का हाइपर-स्पेशलिस्ट जो एक दिन टी20 खेलने के तरीके़ को परिभाषित कर सकता है। रबाडा ने डीप बैकवर्ड प्‍वाइंट, डीप कवर, लांग ऑफ़, लांग ऑन और डीप मिडविकेट रखकर कार्तिक को आख़‍िरी ओवर किया। प्‍लान यही था कि ऑफ़ स्‍टंप के बाहर छोटी गेंद की जाए, जिससे कार्तिक लेग साइड पर नहीं मार सकें। दो बार कार्तिक शफ़ल किए और ऑफ़ स्‍टंप के काफ़ी बाहर की गेंद को लेग साइड बाउंड्री की ओर लपेट दिया, लेकिन वह अभी भी केवल अपने बॉटम हैंड और कलाई का इस्‍तेमाल कर रहे थे।
रबाडा ने थोड़ा ग़लत किया लेकिन यह मायने नहीं रखता था।
इस महीने टी20 विश्‍व कप शुरू होने जा रहा है और भारत ने इसी दृष्टिकोण से ख़ुद को आगे बढ़ाया है। यह हमेशा इतना आसान होगा, व्‍यक्तिगत बल्‍लेबाज़ अपनी रिदम से बाहर हो सकते हैं और कई बार शीर्ष क्रम भी जल्‍द ढह सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए देखा जाए तो अच्‍छी प्रक्रिया अच्‍छा परिणाम देती हैं, जैसे कि भारत का पहले बल्‍लेबाज़ी करते हुए रिकॉर्ड सुधरा है।
किसी दिन अच्‍छी प्रक्रिया तुरंत परिणाम देगी, रविवार का दिन वही था, जहां सब कुछ सही तरीके़ से सही समय पर हुआ।

कार्तिक कृष्‍णास्‍वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।