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भारत को अभी प्रसिद्ध कृष्णा की ज़रूरत है

25 साल का यह तेज़ गेंदबाज़ टीम इंडिया की गेंदबाज़ी में विविधता लाता है

छह फ़ीट से अधिक लंबे प्रसिद्ध कृष्णा किसी भी पिच पर उछाल प्राप्त कर सकते हैं। वह अधिकतर गेंदें 'बैक ऑफ़ लेंथ' से करते हैं और उन्हें अपने इसी ही लेंथ पर विश्वास है।
सिर्फ़ लेंथ ही नही प्रसिद्ध की गति भी बहुत तगड़ी है। वह लगातार 140 या उससे अधिक की गति पर गेंदबाज़ी करते हैं। इसलिए वेस्टइंडीज़ के बल्लेबाज़ों के पास उनका कोई तोड़ नहीं था। उन्होंने अपने पहले स्पेल में 4-2-3-2 के आंकड़ें दर्ज किए और एक कम लक्ष्य के चेज़ को उनके लिए मुश्किल बना दिया।
उन्होंने अपने पहले चार ओवर में एक भी फ़ुल लेंथ की गेंद नहीं फेंकी। उनकी इन 24 में से 16 गेंदें तो सिर्फ़ शार्ट ऑफ़ लेंथ की थीं। वेस्टइंडीज़ ऐसी गेंदबाज़ी के लिए तैयार नहीं था।
साउथ अफ़्रीका और वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ हुए मैच इस बात का इशारा करते हैं कि भारत अब वनडे मैचों में भी ऐसी गेंदबाज़ी को प्राथमिकता देने जा रहा है, जो 'हिट द डेक' गेंदबाज़ी कर सकें। ऐसे में उन्हें बीच के ओवरों में भी प्रभुत्व मिल सकेगा।
जब प्रसिद्ध 2018 में पहली बार आईपीएल में खेले थे, तब वह थोड़े से सशंकित लगते थे। उनकी गेंदबाज़ी से यह नहीं लगता था कि वह किस तरफ़ गेंद को मूव कराएंगे। जब वह 2019 से प्रथम श्रेणी में लगातार नियमित खेलने लगे तब उन्हें अपनी शक्तियों का पता लगा।
प्रसिद्ध ने अपनी तीसरी ही गेंद से कैरेबियाई बल्लेबाज़ों को परेशान करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक ऐसी गेंद फेंकी जो ना तो बहुत आगे थी कि उसे ड्राइव किया जा सके और ना ही बहुत पीछे थी कि उसे कट लगाया जा सके। ब्रैंडन किंग कट के लिए गए, बाहरी किनारा लगा और वह आउट थे।
अब बारी डैरेन ब्रावो की थी। यह एक 'टप्पा' गेंद थी, जिसे गुड लेंथ भी कहा जाता है। प्रसिद्ध की लंबाई के कारण उन्हें अतिरिक्त उछाल मिला और ब्रावो दोहरी सोच में चले गए। इसका उन्हें ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ा और वह भी अब पवेलियन में थे।
अब अगला नंबर शमार ब्रुक्स का था। वह बाहरी और अंदरूनी दोनों किनारों से पहले बीट हुए। इसके बाद वह एक शॉर्ट गेंद पर बाल-बाल बचे। अब प्रसिद्ध का पहला स्पेल समाप्त हो चुका था। ब्रुक्स 20 गेंदों में सिर्फ़ दो ही गेंद को ठीक से खेल पाए थे।
20वें ओवर में प्रसिद्ध को दूसरी बार आक्रमण पर लाया गया। फिर से उन्होंने बैक ऑफ़ लेंथ गेंद से बल्लेबाज़ को दोहरे दिमाग़ में लाया कि वह गेंद को ब्लॉक करें या पुल करें। अब वेस्टइंडीज़ का सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ भी पवेलियन में था।
प्रसिद्ध की पावरप्ले गेंदबाज़ी शानदार रही, जिसकी भारत को फ़िलहाल ज़रूरत भी है। 2019 विश्व कप के बाद से भारतीय गेंदबाज़ों का पॉवरप्ले में औसत 130.80 रहा है, जो कि इस मामले में दूसरे नंबर की ज़िम्बाब्वे (76.85) की टीम से लगभग दोगुनी है। इस दौरान मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने सिर्फ़ छह मैच साथ-साथ खेले हैं, जबकि भुवनेश्वर कुमार अब पहले जैसे नहीं रहे। भारत को एक ऐसे गेंदबाज़ की ज़रूरत थी जो शुरुआती ओवरों में विकेट दिलाए, प्रसिद्ध ने वह काम अब तक बख़ूबी किया है।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो हिंदी के दया सागर ने किया है