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अगर कोच द्रविड़ वही हैं जो कप्तान द्रविड़ थे, तो फिर कुछ कड़े फ़ैसलों के लिए तैयार रहिए

बॉक्सिंग डे टेस्ट से पहले द्रविड़ को कुछ कड़े फै़सले लेने पड़ सकते हैं

India head coach Rahul Dravid at a training session, India vs New Zealand, 2nd Test, Mumbai, Day 1, December 3, 2021

प्रशिक्षण सत्र के दौरान भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़  •  BCCI

"खिलाड़ियों को नज़रअंदाज़ या टीम से बाहर करना कभी आसान नहीं होता। अगर देखा जाए तो हमारी टीम में कई शानदार और गुणवत्तापूर्ण खिलाड़ी हैं। इस दौरे पर आए 18 खिलाड़ियों से हर एक खिलाड़ी एक अच्छा खिलाड़ी है। इसी कारण से यह बात साफ़ है कि हमें कुछ कड़े फ़ैसले लेने होंगे और इन 18 बढ़िया खिलाड़ियों में से 11 खिलाड़ियों को चुनना पड़ेगा। साथ ही हम उन फ़ैसलों से नहीं डरते हैं। हम बिना कोई ग़लती किए, काफ़ी ठंडे दिमाग़ से इन फ़ैसलों को लेंगे।"
"कभी-कभी आपको खिलाड़ियों के साथ एक मुश्किल बातचीत के दौर से गुज़रना पड़ता है, और जब मैं कहता हूं कि मुश्किल बातचीत का दौर तो उसका मतलब है कि हर कोई खेलना चाहता है। हर कोई प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनना चाहता है, कोई खिलाड़ी बाहर बैठना नहीं चाहता। हालांकि अगर आपको किसी कारणवश टीम से बाहर बैठना पड़ता है तो आपको एक परीक्षा से गुज़रना पड़ता है कि आप इस परिस्थिति में कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। यह वास्तव में आपके रवैये या कहें कि आपके व्यवहार की परीक्षा है और अब तक मुझे इस टीम से इस बारे में कोई शिकायत नहीं है, और हर खिलाड़ी ऐसी परिस्थिति को काफ़ी बढ़िया तरीक़े से हैंडल करता है।"
यह भारत के मुख्य कोच के रूप में अपने पहले विदेशी टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर राहुल द्रविड़ का बयान था। सेंचुरियन में कौन खेलेगा या कौन नहीं खेलेगा, इस बारे में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने विस्तार से नहीं बताया, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि कुछ खिलाड़ियों के साथ उन्हें मुश्किल बातचीत के दौर से गुज़रना पड़ा होगा।
यह इस काम की मौलिक प्रकृति है, ख़ासकर जब आप भारत जैसे टीम के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करते हैं तो आपको कई बार ऐसे दौर से गुज़रना पड़ता है। द्रविड़ ऐसे समय में इस काम पर आए हैं जब ये बातचीत किसी और समय की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है। साउथ अफ़्रीका में भारतीय दल पर नज़र डालें तो 18 खिलाड़ियों में से सात खिलाड़ी 33 या उससे अधिक उम्र के हैं, और यह आंकड़ा आठ होता अगर रोहित शर्मा भी उपलब्ध होते। पांच अन्य खिलाड़ी भी 30 की उम्र में पहुंच चुके हैं। 30 और 33 से अधिक उम्र के कुछ खिलाड़ियों का फ़ॉर्म काफ़ी समय से ख़राब रहा है। यह तब है जब भारतीय क्रिकेट के सभी विभाग युवा प्रतिभाओं से भरे हुए हैं।
टीम में इस तरीक़े की परिस्थितियां साफ़ संदेश दे रही हैं कि बदलाव का समय ज़्यादा दूर नहीं है।
इससे पहले कि वह दौर आए, द्रविड़ को कुछ मुश्किल व्यक्तिगत फ़ैसलों पर हस्ताक्षर करने होंगे। इन फ़ैसलों की विवेचना निश्चित तौर पर परिणामों के चश्मे के माध्यम से की जाएगी। यह स्पष्ट रूप से अनुचित है, क्योंकि एक उचित निर्णय ख़राब नहीं होता है या उसे वांछित परिणाम के तराज़ू पर नहीं तौलना चाहिए। क्योंकि कप्तानों और कोचों को आमतौर पर दो या अधिक समान रूप से उचित रास्तों के बीच चयन करना होता है, जिनमें से प्रत्येक में किसी का करियर शामिल होता है।
यह स्पष्ट रूप से अनुचित है, लेकिन आपके फ़ैसलों की गरिमा इन्हीं मापदंडों पर तय की जाती है।
यह बात द्रविड़ अच्छी तरह से जानते हैं। हालांकि द्रविड़ की कप्तानी के कार्यकाल के बारे में दो-तीन चीज़ों पर मूल रूप से बात की जाती है। जिसमें या तो वरिष्ठ खिलाड़ियों का असुरक्षा के दौर से गुज़रना, कुछ पेचीदा और हैरान करने वाली रणनीति, टी20 विश्व कप से बाहर हो जाना, युवा खिलाड़ियों को उस तरीक़े के अवसर मिलना, जिनके वे हक़दार थे, साहसिक रणनीतिक निर्णय, और दो विदेशी टेस्ट श्रृंखला जीत शामिल हैं, जिसके बारे में अक्सर बातें की जाती है।
जब चीजें ग़लत हुईं, तो अधिक से अधिक दोष ग्रेग चैपल को चला गया।
द्रविड़ के स्वयंभू सार्वजनिक व्यक्तित्व ने अक्सर उन्हें कोच द्वारा झेली गई सबसे ख़राब आलोचना से बचा लिया। अभी तक द्रविड़ ने एक कोच के रूप में जो भी ग़लतियां की हैं, हो सकता है कि उनकी छवि के कारण वह छुप गई हों और आगे भी ऐसा हो लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि उनके कार्यों या किसी फ़ैसले की आगे चल कर आलोचना की जाए जैसा उनकी कप्तानी के कार्यकाल के दौरान तब की गई थी जब सचिन 194 के निजी स्कोर पर खेल रहे थे और द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी थी। और यह घटना तब की है जब चैपल भारतीय टीम के कोच नहीं बने थे।
अगर कोच द्रविड़, कप्तान द्रविड़ की तरह हैं तो हम इस बात की अपेक्षा कर सकते हैं कि कोहली-द्रविड़ काल में भी कुछ उसी तरह के अप्रत्याशित निर्णय लिए जाएंगे जैसे शास्त्री-कोहली काल में लिए गए थे। बॉक्सिंग डे टेस्ट 2021 उन फ़ैसलों में से एक की शुरुआत हो सकती है।

कार्तिक कृष्णस्वामी ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।