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कौन हैं आकाश मधवाल: मुंबई इंडियंस की नई पेस सनसनी

आकाश ने 25 साल की उम्र तक हार्ड बॉल से प्रोफ़ेशनल क्रिकेट खेला ही नहीं था

24 वर्ष की उम्र में आकाश ने एक पेशेवर क्रिकेटर बनने का मज़बूत इरादा कर लिया था  •  BCCI

24 वर्ष की उम्र में आकाश ने एक पेशेवर क्रिकेटर बनने का मज़बूत इरादा कर लिया था  •  BCCI

'यह मेरा बेस्ट फ़िगर नहीं है, मेरा बेस्ट आना अभी बाक़ी है।'
गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ तीन विकेट लेने के बाद जब मुंबई इंडियंस के तेज़ गेंदबाज़ आकाश मधवाल से उनके इस 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन' पर टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने यह दो टूक जवाब दिया था। प्रज़ेंटशन के दौरान रवि शास्त्री के सवाल पर सिर्फ़ चौथा आईपीएल मैच खेल रहे आकाश का यह जवाब उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है, जो वह अपनी गेंदबाज़ी में भी लगातार दिखा रहे हैं।
इस मैच के ठीक 10 दिन बाद सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ मैच में उन्होंने अपने 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन' को और बेहतर किया और 'करो या मरो' के मुक़ाबले में चार विकेट लिए, जिसमें 19वें ओवर के दो घातक यॉर्कर शामिल थे। उन्होंने अपनी सटीक और पैरों पर प्रहार करती यॉर्कर गेंदों से इन-फ़ॉर्म हेनरिक क्लासेन और घोर प्रतिभाशाली हैरी ब्रूक को स्तब्ध कर दिया।
हालांकि आज से कुछ साल पहले आकाश की ज़िंदगी बिल्कुल अलग थी। उत्तराखंड के रूड़की के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले आकाश अपने गृहनगर के ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौ से पांच की प्राइवेट नौकरी करते थे। आकाश का लिंक्डिन प्रोफ़ाइल बताता है कि वह अपने कॉलेज के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट और फ़ुटबॉल भी खेलते थे और राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयीय खेलों में अपने कॉलेज और विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व भी कर चुके थे। इसके साथ-साथ वह पूरे उत्तराखंड में घूम-घूमकर शौकिया टेनिस बॉल क्रिकेट भी खेलते थे, हालांकि उन्होंने कभी भी गंभीरता से लेदर बॉल क्रिकेट नहीं खेला था।
24 साल की उम्र में आकाश ने टेनिस बॉल क्रिकेट को छोड़कर पेशेवर क्रिकेट में करियर बनाने का आश्चर्यजनक फ़ैसला लिया। यह वह उम्र होती है जब तमाम क्रिकेटर एज ग्रुप और अपने राज्य के लिए क्रिकेट खेलते हुए राष्ट्रीय टीम में पहुंचने की सोचते हैं। लेकिन आकाश को तो अभी शुरुआत करनी थी। 2018 की शुरुआत में वह नौकरी छोड़कर रूड़की में एक प्राइवेट क्रिकेट एकेडमी चलाने वाले अवतार सिंह के पास आए, जो एक समय ऋषभ पंत के भी बचपन के कोच रह चुके हैं।
अवतार सिंह बताते हैं, "आकाश उत्तराखंड के शहरों में घूम-घूमकर टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता था। वह प्रोफ़ेशनल क्रिकेटर नहीं था और लेदर बॉल से खेलने का उसके पास बहुत ही कम अनुभव था। हालांकि उसे क्रिकेट से प्यार था तो वह पढ़ाई और नौकरी के साथ भी क्रिकेट खेलता था। जब उसे लगा कि अब लेदर बॉल क्रिकेट खेलना चाहिए तो वह मेरे पास आया। इसके बाद उसने टेनिस बॉल क्रिकेट की तरफ़ देखा ही नहीं। फिर जब उसने हार्ड बॉल से गेंदबाज़ी करना शुरु किया तो रूका ही नहीं। वह अब उत्तराखंड के लिए तीनों फ़ॉर्मेट में खेलता है और सीमित ओवर क्रिकेट का तो कप्तान भी है। आने वाले समय में वह भारत के लिए भी खेलेगा।"
हालांकि आकाश के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट से हार्ड बॉल क्रिकेट में आने का सफ़र कतई आसान नहीं था। उत्तराखंड रणजी टीम के प्रमुख कोच मनीष झा बताते हैं, "टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने के कारण उसके विचारों और प्रदर्शन में निरंतरता की कमी थी। टेनिस बॉल क्रिकेट में बहुत अधिक प्रयोग होता है। आकाश का भी माइंडसेट वही था, वह बहुत अधिक और सब चीज़ करने की कोशिश करता था। जब वह नया-नया आया था तो उसके साथ मैं लगातार घंटों बात करता था, अभ्यास सत्र में हम एक ही चीज़ पर कई दिनों तक काम करते थे ताकि उसमें वह निरंतरता आ सके। हालांकि वह इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से है तो उसकी सीखने की क्षमता बहुत तेज़ है। वह तेज़ी से हार्ड बॉल क्रिकेट की बारिकियों को सीखता गया और आज देखिए वह दुनिया की सबसे बड़ी लीग में दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज़ों को चकमा दे रहा है।"
हालांकि अवतार सिंह की मानें तो आकाश के सटीक यॉर्कर का राज़ भी टेनिस बॉल क्रिकेट ही है। वह बताते हैं, "टेनिस बॉल क्रिकेट में ग़लतियों की गुंजाइश बहुत कम होती है और वहां यॉर्कर और वैरिएशन का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है। टेनिस बॉल क्रिकेट में गेंद के हल्के होने के कारण बल्लेबाज़ तक गेंद पहुंचते वक़्त गेंद की गति कम हो जाती है, इसलिए गेंदबाज़ और ज़ोर से गेंदबाज़ी करने की कोशिश करता है। टेनिस बॉल से कंधे और शरीर से अधिक ताक़त लगाना पड़ता है। इससे गेंदबाज़ों को अतिरिक्त करने की आदत होती है और जब वे फिर लेदर बॉल क्रिकेट में आते हैं तो आग लगा देते हैं। आकाश ने यही किया और आग लगा दी।"
मनीष बताते हैं कि आकाश 2019-20 के घरेलू सीज़न से पहले उत्तराखंड राज्य क्रिकेट का ट्रायल देने आए थे। तब उत्तराखंड के कोच वसीम जाफ़र हुआ करते थे। जाफ़र, आकाश के स्किड होकर अंदर आती गेंदों से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें पहले ही ट्रायल में टी20 क्रिकेट (सैयद मुश्ताक़ ट्रॉफ़ी) के लिए चुन लिया गया। इसके बाद विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में मनीष उत्तराखंड के प्रमुख कोच बने और उन्होंने आकाश को सभी मैच और तीनों फ़ॉर्मेट खिलाने का विश्वास दिलाया।
मनीष ने कहा, "पहली नज़र में मैं उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसका क्रिकेट का कोई बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन फिर भी उसके अंदर एक्स फ़ैक्टर था। उसकी सबसे अच्छी बात है कि उसकी कुछ-कुछ गेंदें पिच होकर स्किड करती हैं और तेज़ अंदर आती हैं। बल्लेबाज़ उनकी स्किड होती गेंदों को खेलने में देर कर जाते हैं। मैंने उससे बस यही कहा कि विविधता के चक्कर में वह अपनी गेंदबाज़ी से अधिक प्रयोग ना करे और अपना स्वाभाविक तेज़ गेंद डाले। मैंने उसे भरोसा दिलाया कि वह सभी मैच खेलेगा, भले ही वह 10 ओवर में 60 और 70 रन दे रहा हो। जब उसने दो सीज़न अच्छा किया तो मैंने एसोसिएशन से बात की और आकाश को अतिरिक्त ज़िम्मेदारी देने को कहा ताकि वह जो छोटी-छोटी भी ग़लतियां कर रहा है, वह भी ज़िम्मदारी के कारण ना करे। अब वह राज्य के सीमित ओवर टीमों का का कप्तान है और उसने इसे बख़ूबी निभाया है।"
मनीष को भी अवतार सिंह की तरह विश्वास है कि भले ही आकाश ने देर से शुरुआत की है लेकिन वह सूर्यकुमार यादव की तरह भारतीय टीम में जगह बना सकते हैं।

दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं।dayasagar95