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रियान ने दिखाया कि वह फ़िनिशर बनने की क्षमता रखते हैं

उनका टीम में बस यही भूमिका है - हर गेंद को मारो, जिसमें जोखिम बड़ा होता है और ईनाम बहुत छोटा

Riyan Parag plays one through the off side, Rajasthan Royals vs Royal Challengers Bangalore, IPL 2022, Pune, April 26, 2022

पिछली कुछ पारियों में अच्‍छा नहीं कर पाए थे रियान पराग  •  BCCI

आईपीएल 2021 : 10 पारियां, 93 रन, सर्वश्रेष्ठ 25, स्ट्राइक रेट 112.04
ये आंकड़े साबित करते हैं कि कोई खिलाड़ी कितना संघर्ष कर सकता है। तब भी राजस्थान रॉयल्स ने रियान पराग को फ़रवरी में हुई मेगा नीलामी में 3.8 करोड़ देकर ख़रीदा। साफ़ है, वे कुछ जानते थे।
आगे बढ़ने से पहले, चलिए 2021 में उनकी 25 रन की पारी पर ध्यान लगाते हैं। यह पारी 11 गेंद की थी और ऐसे समय पर आई जब राजस्थान को 7.1 ओवर में 99 रन चाहिए थे। संजू सैमसन को दूसरे छोर पर एक साझेदार की ज़रूरत थी और उन्हें उससे ज़्यादा मिला। राजस्थान 222 रन का पीछा करते हुए केवल चार रन से चूक गई, लेकिन वह एक निडर बल्लेबाज़ को तैयार कर रही थी जो मुश्किल काम करने के लिए तैयार था।
पराग की विशेषज्ञता सफलता से अधिक विफलता और जोखिम है। तब भी इससे उनका खेल प्रभावित नहीं होता या उनका बेहतर करने की इच्छा कम नहीं होती। उन्होंने इस सीज़न में अभी तक 67 गेंदें खेली हैं, जिसमें से 31 रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ख़िलाफ़ नाबाद 56 रनों की पारी के दौरान खेली गई। देखा जाए तो जॉस बटलर ने उनसे पांच गुना ज़्यादा गेंद इस सीज़न में खेली हैं। पराग की पारी का मतलब था कि जो टीम 125 तक सिमटती दिख रही थी, उनके पास अब बचाने को 145 रन थे।
पराग अलग तरह से तैयारी करते हैं। बायो-बबल की वजह से अब क्रिकेट जर्नलिस्ट प्री ट्रेनिंग नहीं देख सकते हैं। तब भी आईपीएल टीमों ने सोशल मीडिया पर दर्शकों को मल्टीमीडिया के जरिए आकर्षित किया है।
पराग वह नहीं है कि जब कोच घोषणा करें, "आख़िरी सेट" तो शांत लौट जाएं। पराग दो और मांगेंगे। आख़िरी गेंद? पराग कोच को मनाएंगे कि गेंदबाज़ कुछ और गेंद करें। "एक और गेंद, छह रन जीतने को" और तब वह कोच को मुश्किल क्षेत्ररक्षण लगाने के लिए कहेंगे और उसको भेदना चाहेंगे। अगर वह ऐसा करने में क़ामयाब रहते हैं तो वह दुनिया को अपने बिहू डांस (असम का डांस) के बारे में बताएंगे। फिर कुछ ही घंटों बाद वह बटलर, संजू सैमसन और शिमरन हेटमायर के साथ वीडियो गेम खेलने में व्यस्त हो जाएंगे। संक्षिप्त में कहा जाए तो वह इस दल के एक लोकप्रिय सदस्य हैं, जिसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है।
उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत उनका आत्म​विश्वास है। आपने शायद ही अनुमान लगाया होगा कि मंगलवार से पहले की पांच पारियों में उनके पास 12, 5, 8, 18 और 5 के स्कोर थे। आपने उन्हें शायद ही ऑनलाइन ट्रोलिंग का जवाब देते देखा होगा, जहां लोग उन्हें क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सिर्फ़ डांस करने के लिए कह रहे हैं। इस तरह की ट्रोलिंग नई नहीं है। आप भारतीय महिला बल्लेबाज़ जेमिमाह रॉड्रिग्ज से पूछ सकते हैं।
जब भी वह बल्ले से विफल होती हैं तो उनका गाना, डांस या गिटार प्रेम चर्चा का विषय बन जाता है। क्या क्रिकेट से बाहर उनका लगाव क्या मैदान में उनके प्रदर्शन के साथ कुछ कर सकता है?
लेकिन पराग जानते हैं कि जो लोग आज उन पर लाछन लगा रहे हैं, वे ही लोग एक दिन उन्हें प्यार और सम्मान देने लगेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि वह ऐसी भूमिका (फ़िनिशर) के लिए ही अभ्यास करते हैं जहां पर एक दिन उतार है तो दूसरे दिन चढ़ाव। 20 साल की उम्र में चुनौती लेने की इच्छा ने ही राजस्थान प्रबंधन को प्रभावित किया है।
सीज़न की शुरुआत में आर अश्विन लखनऊ सुपर जायंट्स के ख़िलाफ़ अंतिम क्षण में रिटायर्ड आउट हो गए थे। यह इसलिए था कि पराग बची हुई गेंद पर ज़्यादा से ज़्यादा रन बना सकें। रासी वैन डेर दुसें को भी नंबर चार पर प्रमोट इसलिए ही किया गया था।
पराग की भूमिका की स्पष्टता खेल की एक शानदार समझ से उपजी है, जिसे उन्होंने समय के साथ सावधानीपूर्वक समझा है। उन्हें 14 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने वाला खिलाड़ी होना चाहिए था, लेकिन असम के चयनकर्ताओं ने उस समय महसूस किया कि वह "बहुत छोटा था।"
तब भी 16 साल की उम्र में वह टॉन्टन में यूथ टेस्ट में इंग्लैंड के अंडर 19 गेंदबाज़ों की ख़बर ले रहे थे। 17 साल की उम्र में वह अंडर 19 विश्व कप विजेता थे और 18 की उम्र में वह जसप्रीत बुमराह पर स्कूप और रैंप लगा रहे थे।
पराग कहते हैं कि पिछले सीज़न कोहली से हुई उनकी बातचीत ने खेल के प्रति उनकी सोच को बदल दिया। उन्होंने कहा, "ऑरेंज कैप को भूल जाओ यह तुम्हें नहीं मिलने वाली। तुम्हारा फ़ोकस यह होना चाहिए कि मुश्किल समय में तुम तेज़ 15-20-25 रन कैसे बनाते हो। कितने रन तुमने बनाए इस पर ध्यान मत दो।" ऐसा लगता है कि यह अब उनकी स्मृति का एक हिस्सा बन गया है।
मंगलवार को उनकी शुरू की बल्लेबाज़ी को देखने के बाद ऐसा लगा कि जैसे राजस्थान ने करुण नायर को बाहर करके ग़लती की हो। उनकी क़ाबिलियत और स्टाइल के बल्लेबाज़ बीमा पॉलिसियों की तरह हैं। उन्हें संकट से बचने के लिए ही बुलाया जाता है। यह एक ऐसी भूमिका है जिसे एस बद्रीनाथ ने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए सालों-साल किया।
इस साल हालांकि, राजस्थान ने कोई एक रास्ता नहीं अपनाया है। वे उच्च जोखिम उच्च रिटर्न दृष्टिकोण के साथ गए हैं और इसने अधिकतर बार भुगतान किया है। बटलर ने अकेले तीन शतक लगा दिए हैं और सैमसन भी समय समय पर अपनी हिटिंग रेंज दिखाते रहते हैं। इस पिछली पारी से पहले हेटमायर ने एक भी बार 25 से कम रन नहीं बनाए थे।
जब पराग बल्लेबाज़ी के लिए आए तो राजस्थान का स्कोर 48 रन पर चार विकेट था। पराग दबाव में हो सकते थे लेकिन उन्होंने अपना ही खेल खेला, गेंदबाज़ों को चुना और अपने हिटिंग ज़ोन में शॉट लगाए, जिससे उनके अंदर की परिपक्वता दिखी।
हां, वे ख़ुशक़िस्मत भी रहे। अगर वनिंदु हसरंगा कवर पर उनका कैच ले लिए होते तो यह सब नहीं होता। लेकिन अगर आप इस तरह का जोखिम भरा काम करने के लिए तैयार हो तो आपको थोड़े क़िस्मत की ज़रूरत भी होती है। और अगर आप ऑफ़ स्टंप के करीब की यॉर्कर को एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से छक्‍का लगा देते हो तो बिल्‍कुल आप थोड़े और क़िस्मत के लायक हो।
यह किसी भी तरह से कम निर्णायक पारी नहीं थी। यह पराग की उपयोगिता और काम करने की उनकी क्षमता का एक उदाहरण था। आख़िर कोई पारी में सिर्फ़ 10 गेंदों का सामना करने की तैयारी कैसे कर सकता है? दिनेश कार्तिक से पूछो या फिर इसी दिशा में काम कर रहे पराग से भी।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।