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साहब, बीसीबी और ग़ुलाम : बांग्लादेश क्रिकेट में बोर्ड अध्यक्ष के नियंत्रण की कहानी

कप्तान शाकिब अल हसन को एक ख़राब फ़ॉर्म में चल रही टीम की कमान सौंपी गई है

अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों से बात कते नज़मुल हसन (फ़ाइल फ़ोटो)  •  BCB

अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों से बात कते नज़मुल हसन (फ़ाइल फ़ोटो)  •  BCB

सोमवार को आगामी एशिया कप में बांग्लादेश को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष नज़मुल हसन ने कहा, "किसी मुख्य कोच की ज़रूरत नहीं है। हमारे पास बल्लेबाज़ी कोच, स्पिन कोच, तेज़ गेंदबाज़ी कोच और फ़ील्डिंग कोच हैं। कप्तान है, तकनीकी सलाहकार हैं जो हमें गेम प्लान देंगे। टीम निदेशक हैं, जलाल [यूनुस, बीसीबी के क्रिकेट संचालन अध्यक्ष] भाई हैं, मैं हूं...और क्या चाहिए?"
यह अजीब लग सकता है, लेकिन नज़मुल सही कह रहे थे। बीसीबी ने श्रीधरन श्रीराम को "टी20 के लिए तकनीकी सलाहकार" रखा है, लेकिन वह असल में टी20 टीम के मुख्य कोच हैं। रसल डॉमिंगो फ़िलहाल टी20 की ज़िम्मेदारियों से मुक्त हैं। उनके साथ काम करने वालों में जैमी सिडंस, रंगना हेराथ, ऐलन डॉनल्ड और शेन मैक्डरमट के साथ-साथ टीम के निदेशक ख़ालिद महमूद भी हैं। बांग्लादेश टीम प्रबंधन वास्तव में बीसीबी अध्यक्ष तक विस्तृत है। अगर नज़मुल को लगता है कि इस प्रबंधन में औपचारिक मुख्य कोच की कोई ज़रूरत नहीं है तो यही सबसे बड़ा सत्य है।
लेकिन बहुत ही अहम ओहदे वाले लोगों के समूह द्वारा लिए गए फ़ैसले कप्तान पर बोझिल होते हैं। अभी इसका सामना शाकिब अल हसन करेंगे। वह मैदान पर फ़ैसले लेंगे और मैच के नतीजे के बावजूद न केवल कोच या कोचों या चयनकर्ताओं बल्कि बोर्ड प्रमुख और निदेशकों के प्रति जवाबदेह होंगे। वैसे उनके पास एक ख़राब फ़ॉर्म में चल रही बांग्लादेश टीम चुनौती के रूप में पर्याप्त है।
शाकिब के लिए यह स्थिति नई नहीं है, लेकिन यह आसान नहीं होगा।
सच्चाई यह है कि बांग्लादेश क्रिकेट में सब कुछ वापस नज़मुल पर ही आकर रुक जाता है। खिलाड़ी इसे जानते हैं, सभी कोच भी सचेत हैं। चयनकर्ताओं को 2016 के बाद से नज़मुल की स्वीकृति लेनी पड़ी है। अतीत में नज़मुल प्लेइंग-XI में उनसे सलाह नहीं लेने पर टीम प्रबंधन की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने बड़े टूर्नामेंट से दो हफ़्ते पहले कोचिंग स्टाफ में "कड़े बदलाव" करने के लिए अपनी ताक़त का इस्तेमाल किया है।
नज़मुल खिलाड़ियों को कुछ सीरीज़ में शामिल होने के लिए निर्देश दे सकते हैं और जब उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ कोई संन्यास लेता है तो वह इसे पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने सीरीज़ के दौरान और बाद में प्रदर्शनों की आलोचना की है। यह स्पष्ट है कि नज़मुल टीम मीटिंग में बैठते हैं, वह नियमित रूप से खिलाड़ियों और कोचों को सलाह-मशविरा के लिए अपने आवास पर बुलाते हैं। ज़ाहिर है वह इस बारे में मीडिया से बात करना भी पसंद करते हैं।
2009 में मुस्तफ़ा कमाल के बोर्ड प्रमुख बनने के बाद से बीसीबी को एक दशक से भी अधिक समय से टीम के मामलों में दखल देने की ख़्याति प्राप्त है। मुस्तफ़ा राष्ट्रीय टीम के सभी मामलों पर नियंत्रण रखना पसंद करते थे।। अनजाने में या दूसरी तरह से नज़मुल ने अपने शासनकाल के कुछ वर्षों में इस चीज़ को अपना लिया। बोर्ड प्रमुख के रूप में नौ वर्षों में उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि जो भी कोच या कप्तान हों नज़मुल और बोर्ड निदेशक सभी फ़ैसले लेंगे। तो वह शाकिब या बांग्लादेश क्रिकेट कप्तानों को सामान्य रूप से कहां तक इजाज़त देते हैं?
19 अगस्त को नज़मुल से शाकिब की भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों के बारे में पूछा गया।
उन्होंने कहा, "एक बात याद रखिए, जब शाकिब कप्तान होते हैं तो कोच कौन होगा इस बारे में कभी कोई समस्या नहीं होती है। वह सर्वश्रेष्ठ एकादश का चयन करता है। आपको यह पता होना चाहिए। वह इसे अपने दम पर तय करता है। बेशक़ वह कोच की सलाह लेता है, लेकिन सर्वश्रेष्ठ एकादश के चयन के संबंध में कोच भी कप्तान को प्राथमिकता देते हैं। वह शायद उस गेम प्लान को समझाता है जो वह कर सकता है। भले ही हमारे पास मुख्य कोच न हो पर हमारे पास ख़ालिद महमूद और जलाल यूनुस होंगे।"
सोमवार को यह पूछे जाने पर कि ऐसी अनोखी परिस्थितियों में किसी टीम की कप्तानी करना कितना मुश्किल है, तो शाकिब ने कूटनीतिक जवाब दिया। उन्होंने कहा, "चुनौतियां हर जगह मौजूद हैं, चाहे वह हमारी टीम हो, फ़्रैंचाइज़ी क्रिकेट हो या कोई अन्य क्रिकेट बोर्ड हो। क्रिकेट बोर्ड या फ़्रैंचाइज़ी की हालत की परवाह किए बिना इस चुनौती की अलग-अलग श्रेणियां हैं।"
क्या शाकिब सुरक्षित खेल रहे थे? बेशक़। हाल के दिनों में जिस तरह से बीसीबी ने कुछ कप्तानों के साथ व्यवहार किया है, वह संकेत देने के लिए काफ़ी है, शाकिब जैसे क़द के किसी खिलाड़ी के लिए भी।

मोहम्मद इसाम ESPNcricinfo के बांग्लादेशी संवाददाता हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो हिंदी के ए़डिटोरियल फ़्रीलांसर कुणाल किशोर ने किया है