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एशिया कप के प्रदर्शन से भारतीय टीम को क्या सीख मिली?

टी20 विश्व कप से पहले भारतीय टीम को कई पहेलियों को सुलझाना होगा

एशिया कप से बाहर होने के बाद भारत के सामने कई पहेलियां हैं  •  Getty Images

एशिया कप से बाहर होने के बाद भारत के सामने कई पहेलियां हैं  •  Getty Images

भारत ने एशिया कप के लिए उपलब्ध खिलाड़ियों में सबसे मज़बूत टीम चुनी थी। उन्हें यह देखना था कि उनकी टीम बड़े टूर्नामेंट के दबाव को कैसे झेलती है? यह उम्मीद जताई गई थी कि उनकी टीम फ़ाइनल में जगह बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस प्रतियोगिता में भारत ने जिस तरह से प्रदर्शन किया, उससे यह साफ़ पता चलता है कि मौजूदा टीम में कई ऐसी समस्या है, जिनका निदान प्राप्त करना बहुत ज़रूरी है।
टॉस ने मुश्किल बनाया मामला
टॉस दुबई में किसी भी जीत या हार में एक बड़ा कारक होता है। सुपर 4 के तीनों मैचों में भारत को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए कहा गया। दुबई एक ऐसी जगह, जहां लक्ष्य का पीछा करना काफ़ी आसान होता है। दो नज़दीकी मुक़ाबलों में भारत ने श्रीलंका और पाकिस्तान को दबाव में ज़रूर डाला लेकिन वे जीत हासिल करने में सक्षम नहीं हो पाए।
भारतीय टीम के लिए सब कुछ ठीक-ठाक तब रहा, जब वे मानसिक रूप से थोड़ी सी परेशान और थकी हुई टीम अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ मैदान पर उतरी। भले ही वह एक औपचारिक मैच की तरह था लेकिन उस मैच में भारत ने सम्मानजनक से ज़्यादा का स्कोर बनाया और फिर से आसानी उस स्कोर की रक्षा भी की।
हालांकि उन्हें अब भी इस बात के प्रति सचेत होना होगा कि उन्हें डेथ ओवर की गेंदबाज़ी और मध्यक्रम बल्लेबाज़ी पर काफ़ी काम करना है। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू शृंखला के साथ-साथ टी20 विश्व कप के लिए टीम चुनने के लिए चयनकर्ताओं की अगले सप्ताह बैठक होने वाली है।
तीसरे तेज़ गेंदबाज़ के रूप में हार्दिक को कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली
हार्दिक पंड्या ने ज़ोरदार अंदाज़ में टूर्नामेंट की शुरुआत की थी। उनकी शॉर्ट गेंद वाली रणनीति पाकिस्तान के ख़िलाफ़ काफ़ी कारगर भी साबित हुई। हालांकि जब अवेश ख़ान अनुपलब्ध नहीं थे और भारत को तीसरे तेज़ गेंदबाज़ के रूप में एक ऑलराउंडर की ज़रूरत थी तो चीज़ें इतनी आसान नहीं रही।
जब भारत 183 और 171 रनों के लक्ष्य की रक्षा रहा था, तब हार्दिक ने आठ ओवर में 71 रन देकर एक विकेट लिया। बाद में भारतीय टीम में दीपक चाहर को शामिल किया गया लेकिन तब तक सब कुछ ख़त्म हो चुका था।
भारतीय टीम को मिली दो हार के बाद रोहित शर्मा ने सिर्फ़ दो तेज़ गेंदबाज़ के साथ मैदान पर उतरने का कारण बताते हुए कहा, "अगर आप एशिया कप की शुरुआत से पहले हमारे टीम संयोजन को देखें तो यह चार तेज़ गेंदबाज़ों और दो स्पिनरों के साथ था और दूसरा स्पिनर एक ऑलराउंडर था। मैं हमेशा यह कोशिश कर के देखना चाहता था कि अगर आप तीन तेज़ गेंदबाज़ों और दो स्पिनरों के साथ खेलते हैं, जिसमें तीसरा स्पिनर एक ऑलराउंडर हो तो क्या होता है?"
इस बात की पूरी संभावना है कि ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ और विश्व कप के लिए भारतीय दल में जसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल शामिल होंगे। इसका मतलब है कि हार्दिक एक बार फिर छठे गेंदबाज़ के रूप में अपनी सामान्य भूमिका में वापस आ जाएंगे और वह इस कार्य में उत्कृष्ट हैं।
हुड्डा का चयन
आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दीपक हुड्डा मुख्य रूप से शीर्ष चार में बल्लेबाज़ी करते हुए ही सफल रहे थे। एशिया कप में वह रवींद्र जाडेजा की अनुपस्थिति में फ़िनिशर और छठे गेंदबाज़ी विकल्प थे। हालांकि तीन मैचों में उन्होंने सिर्फ़ एक ओवर फेंका और वह भी अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़, जब मुक़ाबला पहले ही भारत की झोली में आ चुका था। इसके कारण टीम में दिनेश कार्तिक को जगह नहीं मिली। कार्तिक को पिछले कुछ समय में फ़िनिशर के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन जब भारत को पाकिस्तान और श्रीलंका के ख़िलाफ़ डेथ ओवरों में उस भूमिका के लिए किसी की ज़रूरत थी तो कार्तिक टीम में नहीं थे।
रोहित ने बाद में हुड्डा को श्रीलंका के ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी करने के लिए नहीं आने के बारे में बताया क्योंकि वह मुख्य रूप से बल्लेबाज़ों की उस जोड़ी के सामने नहीं उतारना चाहते थे, जिन्होंने स्पिनरों के ख़िलाफ़ 11.1 ओवरों में 97 रन बनाए थे। यह तर्क काफ़ी हद तक उचित भी है लेकिन सिर्फ़ एक मैच पहले भारत के पास फख़र ज़मान के ख़िलाफ़ हुड्डा को गेंदबाज़ी कराने का मौक़ा था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जाडेजा की गैरमौजूदगी से हुआ नुक़सान
भारत ने पिछले डेढ़ साल में अक्षर पटेल को काफ़ी मौक़ा दिया है, जिन्हें जाडेजा का एक बढ़िया विकल्प माना जाता है। फिर भी जब उस निवेश को भुनाने का समय आया तो भारत पूरी तरह से अलग दिशा में चला गया और इसके बजाय हुड्डा को चुना गया। जाडेजा की अनुपस्थिति का मतलब यह भी था कि भारत को शीर्ष छह में कम से कम एक बाएं हाथ के बल्लेबाज़ के लिए ऋषभ पंत को टीम में लाना होगा। इस बदलाव को समायोजित करने के लिए कार्तिक को टीम से बाहर रखा गया। पंत को मिले तीन मौक़ो में उन्होंने 14, 17 और 20 * के स्कोर बनाए।
टी20 मैचों में भारतीय टीम के पास एक नया संयोजन
कोहली ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ शतक लगा कर ना सिर्फ़ अपने शतक के सूखे को समाप्त किया बल्कि पहला टी20 अंतर्राष्ट्रीय शतक भी बनाया। रोहित ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ 41 गेंदों में 72 रनों की तूफ़ानी पारी खेली और केएल राहुल ने अपने फ़ॉर्म और लय को ढूंढने के लिए काफ़ी धीमी शुरुआत की। यदि शीर्ष क्रम टूर्नामेंट में आने से पहले एक चिंता का विषय था, तो वह मामला अब लगभग-लगभग सुलझ चुका है।
श्रीलंका के ख़िलाफ़ खेले गए मैच में रोहित और सूर्यकुमार यादव ने सकारात्मक क्रिकेट खेलना जारी रखा, बावजूद इसके कि भारत तीन ओवर में 2 विकेट पर 13 रन ही बना पाया था। भले ही शीर्ष तीन में खेलने वाले बल्लेबाज़ पहले ही गेंद से आक्रामक नहीं हो रहे थे लेकिन जितना संभव हो उतना आक्रामक होने का एक ठोस प्रयास किया जा रहा था। हालांकि मध्यक्रम से इस बार कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आया और इससे पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उनके सुपर 4 मैच में थोड़ा उलटा असर पड़ा।
तीसरा स्पिनर कौन?
युज़वेंद्र चहल के पास यह टूर्नामेंट काफ़ी ख़राब था लेकिन श्रीलंका के ख़िलाफ़ लिए गए तीन विकेट ने भारत को मैच में बनाए रखा। ऑस्ट्रेलिया में बड़े मैदानों पर उनकी गेंदबाज़ी की शैली काफ़ी कारगर साबित हो सकती है। यदि जाडेजा टी20 विश्व कप के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं और अक्षर उनकी जगह लेते हैं तो चयनकर्ताओं को आर अश्विन के अनुभव और रवि बिश्नोई की नवीनता के बीच चयन करना होगा। दोनों खिलाड़ियों ने एशिया कप में मिले सीमित मौकों में अच्छा प्रदर्शन किया है। बिश्नोई गुगली को अपनी स्टॉक बॉल के रूप में फेंकते हैं। चयनकर्ताओं के लिए इनमें से किसी एक को चुनना आसान नहीं होगा।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं