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राहुल : टेस्ट क्रिकेट में कभी भी कोई आसान जीत नहीं मिलेगी

काफ़ी समय बाद टेस्ट क्रिकेट खेल रही टीम को इतने समय तक मैदान पर टिक पाने की चिंता हो रही थी

पांच दिनों की मेहनत करते हुए चटगांव टेस्ट जीतने के बाद भारत को शाम में फ़ुटबॉल विश्व कप देखते हुए टीम डिनर का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही जुलाई के बाद पहली बार खिलाड़ियों को पांच दिन के क्रिकेट से जुड़ी थकान भी महसूस होगी।
स्कोरकार्ड देखकर यही पता चलेगा कि भारत ने बड़ी जीत दर्ज की लेकिन इसे पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। पहली पारी में बल्ले के साथ वापसी करनी पड़ी और फिर टीम को दूसरी पारी में पहली विकेट लेने के लिए 46 ओवरों का इंतज़ार करना पड़ा। छह महीने बाद वापसी पर ऐसा ही टेस्ट चाहिए होता है। इसके बाद विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल की राह में घर पर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध कठिन सीरीज़ भी खेली जानी है।
भारतीय कप्तान के एल राहुल ने मैच के बाद कहा, "यह टेस्ट क्रिकेट है : आपको कभी भी कोई आसान जीत नहीं मिलेगी। हम यह बात जानते हैं। हमने इतना टेस्ट क्रिकेट खेला है कि यह समझ आ जाए कि मैच के दौरान ऐसा भी समय आएगा जब विपक्षी टीम अच्छा खेलेगी। हमें उसका सम्मान करते हुए अपना काम करते जाना होगा। मुझे इस बात पर गर्व है।"
राहुल ने आगे कहा, "इस टेस्ट मैच के दौरान हमारी ऊर्जा और तीव्रता बहुत अच्छी थी और हमने दिन भर इसे बरक़रार रखा। पिछले पांच दिनों में हमने टीम के विरुद्ध प्रतिबद्धता दिखाई है। हमने काफ़ी समय से टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है और इस वजह से चिंता यह थी कि हमारा शरीर किस प्रकार प्रतिक्रिया देगा और हम कैसे इतने समय तक मैदान पर टिक पाएंगे। हमने बहुत अच्छे अंदाज़ से ऐसा किया।"
जैसा कि हालिया वर्षों में भारतीय टेस्ट टीम में देखा गया है, टीम से अंदर-बाहर होने वाले खिलाड़ियों ने मौक़ों को बुनाया। बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे, शुभमन गिल ने पहला टेस्ट शतक जड़ा और मोहम्मद सिराज ने अच्छी गेंदबाज़ी की। राहुल से पूछा गया कि वह किस तरह नियमित मौक़े नहीं मिलने वाले इन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बनाए रखते हैं।
इस पर राहुल ने कहा, "इस स्तर पर खिलाड़ी स्वाभाविक रूप से बहुत प्रेरित होते हैं। हम अपने देश के लिए खेल रहे हैं, हमने यहां आने के लिए बचपन से ही कड़ी मेहनत की है। हां कभी-कभी जब आप टीम से अंदर और बाहर होते हैं और आपको बहुत अधिक अवसर नहीं मिलते हैं, तो पर्याप्त आत्मविश्वास महसूस नहीं होना स्वाभाविक है। लेकिन एक समूह के रूप में, एक टीम के रूप में, हम हमेशा सभी को सहज महसूस कराने की कोशिश करते हैं। बात हमेशा इस बारे में होती है कि टीम को क्या चाहिए, न कि व्यक्तियों के बारे में।"
भारतीय सलामी बल्लेबाज़ ने आगे कहा, "आपने 50 टेस्ट मैच खेले हो या फिर एक या दो, इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता। हम हमेशा यह देखते हैं कि टीम को क्या चाहिए और क्रिकेट का मैच जीतने के लिए क्या किया जाना है। इन खिलाड़ियों ने पर्याप्त क्रिकेट खेला है। मैं जानता हूं कि उन्होंने इतना अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला लेकिन घर पर, प्रथम श्रेणी क्रिकेट, आईपीएल, इंडिया ए, और बहुत क्रिकेट हो रहा है। तो हर कोई पर्याप्त क्रिकेट खेल रहा है। जब वह भारतीय टीम में आते हैं, वह कई मैच खेलकर आते हैं। इससे उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने में मदद मिलती है। आप उन्हें मंच और थोड़ा आत्मविश्वास देते हैं। उनके पास गुणवत्ता है और वह इसलिए यहां हैं और वह बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं।"
जब रोहित शर्मा, रवींद्र जाडेजा या मोहम्मद शमी वापस आएंगे तब भारत को टीम चयन पर विचार-विमर्श करना होगा। रोहित बांग्लादेश नहीं पहुंचे हैं और दूसरे टेस्ट में उनकी उपलब्धता पर फ़ैसला आना बाक़ी है। रोहित की वापसी से ज़्यादा अंतर नहीं होगा क्योंकि भारत को पता है कि गेंदबाज़ी ने जीत की नींव रखी थी।
राहुल ने कहा, "पहली पारी की गेंदबाज़ी ने हमें इस टेस्ट में बहुत समय दिया। अगर बांग्लादेश 300-350 बनाती तो मैच ड्रॉ की तरफ़ बढ़ रहा होता। हमने नतीजा लाने की बहुत कोशिश की होती, अपने लिए मौक़ा बनाया होता लेकिन यह बहुत कठिन होता। जब आप किसी टीम को 150 पर समेटते हैं, इससे आपको बहुत समय मिलता है। हम और 50-60 ओवर बल्लेबाज़ी करते हुए तेज़ी से रन बना सकते थे और उन्हें दो दिनों के लिए बल्लेबाज़ी करने के लिए उतार सकते थे। इससे हमें उन्हें आउट करने का समय मिल गया।"