भारत के दिसंबर-जनवरी के साउथ अफ़्रीका दौरे पर फ़िलहाल असमंजस की स्थिति बनी बनी हुई है। यह समझा जा रहा है कि अफ़्रीकी महाद्वीप में बढ़ते कोरोना मामलों के कारण भारतीय टीम को साउथ अफ़्रीका का दौरा करने के लिए विशेष सरकारी अनुमति की आवश्यकता होगी। हालांकि दोनों देशों के बीच की सीमाएं इस समय खुली हुई हैं और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अधिकारियों को यात्रा संबंधी नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

यदि सीमाएं बंद हो जाती हैं, तो इस दौरे की संभावना बहुत कम हो जाएगी। नीदरलैंड की टीम फ़िलहाल साउथ अफ़्रीका में ही वनडे सीरीज़ खेलने के लिए है, उन्होंने अगले दो मैचों को स्थगित करने का विकल्प चुना है। वहीं ज़िम्बाब्वे में महिला एकदिवसीय विश्व कप क्वालीफ़ायर को पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। हालांकि इंडिया ए और साउथ अफ़्रीका के बीच चल रही लाल गेंद की सीरीज़ अभी भी जारी है। इस सीरीज़ के तीन में से दो मैच अभी बाक़ी हैं।

इंडिया ए के स्वदेश नहीं लौटने का मतलब यह हो सकता है कि सीनियर टीम भी इसका अनुसरण करेगी। लेकिन अधिकतर देशों द्वारा अब साउथ अफ़्रीकी क्षेत्र में यात्रा प्रतिबंध जारी किया जा रहा है और स्थितियां तेज़ी से बदल रही हैं। यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया ने इस क्षेत्र से आने-जाने पर रोक लगा दी है। साउथ अफ़्रीकी सरकार उन प्रतिबंधों को उलटने के लिए उनसे याचिका दायर कर रही है।

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो को बताया, "बीसीसीआई ने निर्णय लिया है कि वह कोई भी फै़सला लेने में कोई जल्दबाज़ी नहीं करेगा। हम स्थिति पर क़रीब से नज़र रख रहे हैं और खिलाड़ियों की सुरक्षा बीसीसीआई और सीएसए दोनों के लिए सर्वोपरि है। दोनों बोर्ड आपसी संपर्क में हैं। वे जल्द ही अंतिम निर्णय लेंगे। हम भारत सरकार के यात्रा निर्देशों का पालन करेंगे।"

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और देश के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "ऐसी स्थिति में हर बोर्ड को भारत सरकार से अनुमति लेनी चाहिए।" 17 दिसंबर से 26 जनवरी तक चलने वाले भारत के साउथ अफ्ऱीका दौरे में तीन टेस्ट, तीन वनडे और चार टी20 मैच शामिल हैं।