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सीमित ओवर क्रिकेट में भारतीय टीम का दरवाज़ा खटखटाना चाहते हैं मयंक

भारतीय सलामी बल्लेबाज़ आईपीएल 2022 की निराशा को पीछे छोड़ चुके हैं

मयंक अग्रवाल ने स्वीप और रिवर्स स्वीप को अपने खेल में जोड़ा है  •  Maharaja T20

मयंक अग्रवाल ने स्वीप और रिवर्स स्वीप को अपने खेल में जोड़ा है  •  Maharaja T20

आईपीएल 2019 में 332, आईपीएल 2020 में 424 और आईपीएल 2021 में 441 रन बनाकर मयंक अग्रवाल ने एक ख़तरनाक सलामी बल्लेबाज़ के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उनके इस शानदार प्रदर्शन के चलते उनकी टीम पंजाब किंग्स ने उन्हें 12 करोड़ रुपये देकर रिटेन किया और अगले सीज़न में अपना कप्तान बनाया।
सभी को उम्मीद थी कि मयंक सफलता की सीढ़ी पर आगे बढ़ते ही चले जाएंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आईपीएल 2022 उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। सीज़न की शुरुआत उन्होंने सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर की थी और अंत तक आते आते वह चौथे और पांचवें नंबर पर खेलने लगे थे। इतना ही नहीं, पिछले तीन सालों में बढ़-चढ़कर बोलने वाला उनका बल्ला अचानक शांत हो गया था। ना तो उनके खेल में वह सवाभाविक लय नज़र आ रही थी और उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया था।
नतीजतन मयंक ने 13 मैचों में 16.33 की साधारण औसत के साथ केवल 196 रन बनाए।
हालांकि अब आईपीएल 2022 की निराशा को वह पीछे छोड़ चुके हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने इस सीज़न को पूरी तरह भुला दिया है बल्कि वह अपनी ग़लतियों पर काम करने लगे हैं। यह महाराजा ट्रॉफ़ी टी20 प्रतियोगिता में उनकी बल्लेबाज़ी में साफ़ झलकता है जहां मयंक सर्वाधिक रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम किए हुए हैं।
आईपीएल की निराशा के बाद पहली बार प्रतिस्पर्धी मैच खेल रहे मयंक ने बेंगलुरु ब्लास्टर्स की ओर से खेलते हुए अब तक 11 मैचों में 53.33 की औसत से 480 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 167.24 का रहा है और उन्होंने एक अर्धशतक के साथ-साथ दो दमदार शतक भी जड़े हैं।
उनकी बल्लेबाज़ी की विशेषता रही है कि वह भरपूर आत्मविश्वास के साथ हर गेंद को खेल रहे हैं। इसके अलावा उनका फ़ुटवर्क बेहतरीन रहा है। और तो और इस अवधि में उन्होंने हवाई कवर ड्राइव, स्कूप जैसे कई रचनात्मक शॉट अपने तरकश में जोड़े हैं।
मंगलवार को महाराजा ट्रॉफ़ी में इस सीज़न का अपना दूसरा शतक बनाकर उन्होंने अपनी टीम को फ़ाइनल में पहुंचाया। मैच के बाद उन्होंने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो हिंदी के साथ विशेष बातचीत में अपने बल्लेबाज़ी में किए सुधार का वर्णन किया।
मयंक ने कहा, "पिछले चार महीनों में मैंने अपनी बल्लेबाज़ी पर बहुत मेहनत की है। जैस कि आप देख सकते हैं, मैं स्वीप और रिवर्स स्वीप खेलने लगा हूं और वह भी तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़। मैंने अपने खेल में चार-पांच नए पहलू जोड़े हैं जिससे मुझे बहुत लाभ मिल रहा है।" मयंक को ख़ुशी है कि उन्हें अपनी कड़ी मेहनत का फल मिल रहा है।
यह तो हुई बल्लेबाज़ी की बात। इसके अलावा मयंक ने अपनी कप्तानी से सभी को प्रभावित किया है। उन्होंने अपने खिलाड़ियों को पूरी स्वतंत्रा दी हैं कि वह मैदान पर निडर होकर अपना योगदान दें। जब युवा बल्लेबाज़ एलआर चेतन महाराजा ट्रॉफ़ी के तीसरे शतकवीर बने थे, उन्होंने बताया था कि कैसे कप्तान मयंक ने उन्हें आक्रामक रवैया अपनाकर खेलने की आज़ादी दी। जब किसी गेंदबाज़ को रन पड़े, मयंक ने सबसे पहले जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा और उसका हौसला बनाए रखा।
मयंक की यह ऊर्जा फ़ील्डिंग के दौरान भी साफ़ दिखाई दे रही है। 21 अगस्त को हुबली टाइगर्स के विरुद्ध क़रीबी मुक़ाबले में सीमा रेखा पर रहकर एक निर्णायक कैच लेने के बाद उनकी प्रतिक्रिया से पता चल रहा था कि यह टूर्नामेंट उनके लिए कितना मायने रखता है।
जब उन्होंने मंगलवार को इस टूर्नामेंट का दूसरा शतक जड़ा तब भी जश्न में उनका उत्साह साफ़ देखने को मिला। भारतीय टेस्ट टीम के नियमित सदस्य से एक राजकीय टी20 प्रतियोगिता में शतक बनाने के बाद ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की जाती है। हालांकि मयंक के लिए यह महाराजा ट्रॉफ़ी निराशा के अंधकार के बाद हुए आत्मविश्वास के सूर्योदय का काम कर रही है।
अपने आत्मविश्वास पर मयंक ने कहा, "महाराजा ट्रॉफ़ी जैसे टूर्नामेंट में दो शतक बनाकर मैं प्रसन्न हूं। मुझे ख़ुशी होती है जब अन्य खिलाड़ी योजना के तहत आगे बढ़ते हैं और उम्मीदों पर खरे उतरते हैं। ज़ाहिर है कि जब रन बनते हैं तो मुझे अच्छा लगता है और यह मेरी कप्तानी में झलकता है।"
एक समय पर आईपीएल में धूम मचाने के बाद मयंक को भारतीय वनडे टीम में स्थान दिया गया था। हालांकि फ़रवरी 2020 में अपना डेब्यू करने के बावजूद मयंक ने दो सालों में केवल पांच वनडे मुक़ाबले खेले हैं। टी20 अंतर्राष्ट्रीय प्रारूप में तो उन्हें अपने डेब्यू का इंतज़ार है।
मयंक के पास वह कौशल और सारे शॉट है जो तीनों प्रारूपों में उन्हें भारतीय टीम का नियमित सदस्य बना सकता है। वह टेस्ट टीम का तो हिस्सा रहे हैं लेकिन देखकर ऐसा लगता है कि मयंक अब सीमित ओवर क्रिकेट में भारतीय टीम का दरवाज़ा खटखटाना चाहते हैं।
भारतीय वनडे टीम में वापसी की बात पर मयंक ने कहा, "मैं हार मानने वालों में से नहीं हूं। मैं अपने खेल को बेहतर करता रहूंगा और अपने लक्ष्य का पीछा करता रहूंगा। मुझे जितना भी मिलेगा उसकी ख़ुशी ज़रूर होगी लेकिन ख्वाहिशें और सपने हमेशा ज़िंदा रहते है।"
महाराजा ट्रॉफ़ी में मयंक ने फ़ॉर्म में वापसी की है और अब यहां से वह रुकना नहीं चाहेंगे। और अगर उनका बल्ला ठीक इसी तरह बोलता रहा, तो उन्हें कोई रोक भी नहीं पाएगा।

अफ़्ज़ल जिवानी (@jiwani_afzal) ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं।