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माउंट मॉन्गानुई में बांग्लादेश के चमत्कार को नमस्कार

इस मैच से पहले बांग्लादेश क्रिकेट के सामने कई बाधाएं थीं लेकिन टीम ने फिर भी इतिहास रची

The Bangladesh fans made themselves heard in Mount Maunganui, New Zealand vs Bangladesh, 1st Test, Mount Maunganui, 5th day, January 5, 2022

कठिन परिस्थितियों में बांग्लादेश की टीम ने अपने फैंस को नए साल का ख़ूबसूरत तोहफ़ा दिया है।  •  Getty Images

लगभग दो हफ़्ते पहले तक बांग्लादेश के न्यूज़ीलैंड दौरे पर अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था। एक सप्ताह अपने होटल के कमरों में रहने के बाद न्यूज़ीलैंड के स्वास्थ्य अधिकारीयों ने बांग्लादेश टीम को तीन दिन और क्वारंटीन करने का आदेश दिया। स्पिन बोलिंग कोच रंगना हेराथ कोरोना संक्रमित पाए गए थे और आठ अन्य खिलाड़ियों को बांग्लादेश से आने वाले विमान में किसी कोविड पॉज़िटिव व्यक्ति का क़रीबी कॉन्टैक्ट माना गया था। बबल थकान आधुनिक क्रिकेट की एक बड़ी चुनौती रही है लेकिन बांग्लादेश के लिए सभी आसार थोड़े कठिन लग रहे थे।
मैदान पर इस टीम को पाकिस्तान ने टेस्ट सीरीज़ में 2-0 से रौंदा था। दूसरे टेस्ट में लगभग ढाई दिन के खेल में बांग्लादेश पारी के अंतर से हारा था। इस श्रृंखला से पहले टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को स्कॉटलैंड ने हराया था और ग्रुप स्टेज में घुसने के बाद टीम ने अपने सभी मैच हारे थे।
ऊपर से न्यूज़ीलैंड में बांग्लादेश के इतिहास के दो सबसे दिग्गज खिलाड़ी तमीम इक़बाल और शाकिब अल हसन मौजूद नहीं थे। मेज़बान टीम के कप्तान केन विलियमसन भी चोटिल थे लेकिन बांग्लादेश से फिर भी भीनी-भीनी उम्मीद के अलावा कोई विश्वास नहीं जताया जा सकता था।
आख़िर उनके सामने खड़ा था न्यूज़ीलैंड। टेस्ट क्रिकेट के विश्व विजेता। 144 सालों में पहली बार इस ख़िताब के वास्तविक हक़दार। न्यूज़ीलैंड ने अपने मैदानों पर पिछले 17 टेस्ट मैचों में हार का सामना नहीं किया था और पिछले छह लगातार मैच जीते थे। उन्होंने अपने पिछले आठ सीरीज़ जीते थे और उनके सामने हारने वाली टीमें भी कौन सी - पाकिस्तान, वेस्टइंडीज़ (दो बार), भारत, इंग्लैंड (दो बार), बांग्लादेश और श्रीलंका। घर पर खेलते हुए इस टीम में इतनी क़ाबिलियत है कि उन्होंने टेस्ट इतिहास में एक पारी में 10 विकेट लेने वाले केवल तीसरे गेंदबाज़ ऐजाज़ पटेल को टीम से बाहर रखा
बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक आंकड़े भी उत्साहजनक नहीं थे। टेस्ट छोड़िए, हर अंतर्राष्ट्रीय फ़ॉर्मैट को मिलाकर 32 मैचों में न्यूज़ीलैंड को उन्हीं की धरती पर बांग्लादेश ने 21 वर्षों में कभी नहीं हराया था।
वैसे इतिहास होता ही है बदलने के लिए।
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माउंट मॉन्गानुई में पहला दिन का खेल बराबरी का मुक़ाबला था। न्यूज़ीलैंड ने 258 रन ज़रूर बनाए लेकिन बांग्लादेश ने पांच विकेट भी लिए। दूसरे दिन न्यूज़ीलैंड की पारी जल्दी सिमट गई। और फिर बांग्लादेश के अनुभवहीन टॉप थ्री बल्लेबाज़ों ने 67 ओवर तक बल्लेबाज़ी कर दिखाया। दूसरे और चौथे दिन के बीच बांग्लादेश ने 176.2 ओवर की बल्लेबाज़ी की। शीर्ष के छह बल्लेबाज़ों में से चार ने अर्धशतक बनाए। बांग्लादेश ने 130 रनों की बढ़त बना ली लेकिन एक प्रश्न मन में बार-बार आता रहा।
क्या बांग्लादेश इस गतिशीलता का फ़ायदा उठा पाएगा?
इबादत हुसैन ने इसका बढ़िया जवाब दिया। चौथे दिन के समाप्ति और पांचवे दिन के शुरुआत तक उनकी अगुआई में टीम ने न्यूज़ीलैंड को 169 की स्कोर पर रोका। आख़िर के पांच विकेट 10 मिनट के खेल के भीतर गिर गए। दोपहर के 12 बजे तक बांग्लादेश एक आसान जीत के क़रीब पहुंच चुका था।
अगर इस जीत के स्तर और जीतने के तरीक़े को देखा जाए तो यह चमत्कार से कम नहीं।
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बांग्लादेश के लिए हर खिलाड़ी ने हालिया फ़ॉर्म को ख़ूबसूरती से पलट दिया।
महमुदुल हसन जॉय की भले ही अधिक प्रसंशा हुई हो लेकिन पाकिस्तान के विरुद्ध ख़राब बल्लेबाज़ी करने के बाद शादमन इस्लाम ने आत्मविश्वास भरी पारी खेली। नाजमुल हुसैन शांतो, मोमिनुल हक़ और लिटन दास ने इस बैटिंग इकाई के स्तंभ बनने की प्रबल दावेदारी पेश की। शांतो ने आदर्श नंबर तीन बल्लेबाज़ की तरह सुरक्षा और आक्रमण का सटीक मिश्रण दिखाया। मोमिनुल ने वरिष्ठ खिलाड़ी की तरह ज़िम्मेदाराना अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की और लिटन ने जताया कि वह टेस्ट क्रिकेट में भी माहिर हैं।
इस युवा टीम में मुश्फ़िकुर रहीम, तमीम और शाकिब की ग़ैरमौजूदगी में एक सीनियर प्लेयर के तौर पर अलग दिखे। रहीम बांग्लादेश के लिए 5000 टेस्ट रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बनने के बेहद क़रीब हैं। इस टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने इस प्रयास में केवल 12 रन बनाए लेकिन 85 मिनट तक एक अनुशासित तेज़ गेंदबाज़ी क्रम का डटकर सामना किया। ड्रेसिंग रूम के लिए इसका मतलब यही था कि इस लड़ाई में सब एक साथ हैं।
मैच के बाद मोमिनुल ने कहा, "इस मैच ने दर्शाया कि टेस्ट क्रिकेट में हम बेहतर हो रहे हैं। पाकिस्तान सीरीज़ के बाद पूरी टीम ने सुधार लाने का निर्णय लिया था। कोचिंग स्टाफ़ ने भी हमारा उत्साह बढ़ाया। मुश्फ़िक भाई ने बतौर वरिष्ठ खिलाड़ी हमें भावनात्मक सहारा दिया। एक युवा कप्तान के तौर पर उनका साथ बहुमूल्य था। इस मैच में हमें आगे रखने में जॉय और शादमन का बड़ा हाथ था। साथ ही मेहदी हसन और यासिर अली ने भी अच्छे योगदान दिए।"
बांग्लादेश ने न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध एक पारी में अधिक रन बनाएं हैं लेकिन इस टीम के साथ 170 से ज़्यादा ओवर खेलना सराहनीय था और इसकी वजह से मेज़बान टीम पर दबाव बनाने में मदद मिली।
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एक मायूस 2021 में एक अच्छी बात थी तस्कीन अहमद की वापसी। उन्होंने अपनी फ़िटनेस को सुधारा, बोलिंग एक्शन पर काम किया और बांग्लादेश में तेज़ गेंदबाज़ी पर तवज्जो देने की प्रक्रिया में एक बड़ा क़दम लिया।
इबादत वापसी तो नहीं कर रहे थे लेकिन उनके टेस्ट करियर में अब तक कोई बड़ा योगदान नहीं आया था। लेकिन टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताया। और जब पहली दो पारियों के बाद मैच को फंसाने की बारी आई तो दोनों गेंदबाज़ खरे उतरे। तस्कीन ने टॉम लेथम को आउट किया और इबादत ने फिर छह विकेट झटकते हुए अपने औसत को 81.54 से 56.55 तक किया। 2019 में डेब्यू के बाद उनका स्ट्राइक रेट पहली बार 100 से नीचे है।
मोमिनुल ने अपने तेज़ गेंदबाज़ों की प्रसंशा में कहा, "इबादत ने पिछले तीन सालों में बहुत परिश्रम किया है। इसमें कोचिंग स्टाफ़ का भी बड़ा हाथ है। तस्कीन सिर्फ़ अपना आठवां टेस्ट खेल रहे थे और शोरीफ़ुल इस्लाम केवल अपना दूसरा। उनमें क़ाबिलियत तो है ही, अनुभव के साथ वह और भी बेहतर होंगे।"
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तो इस चमत्कार की रचना कैसे हुई?
वैसे इस में कोई राज़ की बात नहीं थी। बांग्लादेश ने यह टेस्ट अपेक्षाओं के दबाव के बिना खेला। शायद ही किसी ने उनसे इस सीरीज़ में कोई उम्मीद जताई थी। लेकिन अभ्यास के दौरान उनके युवा बल्लेबाज़ों ने परिस्थितियों से परिचय बनाने में जी-तोड़ मेहनत की। मोमिनुल, मुश्फ़िकुर और शांतो जैसे खिलाड़ियों ने अपने पुराने दौरों के अनुभव को भी ज़रूर बांटा होगा।
टीम निदेशक ख़ालिद महमूद जैसे अधिकारीयों के अनुसार पाकिस्तान सीरीज़ के बाद टीम ने काफ़ी आत्म-चिंतन की है। कमज़ोरियों को हटाने के लिए हर खिलाड़ी ने ज़्यादा समय नेट्स में बिताया है। और शायद ढाका से दूर जाने से भी मदद मिली। 2021 के प्रदर्शन को लेकर काफ़ी बातचीत चल रही थी और विदेश के दौरे पर इसका शोर सुनना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
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जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 2005 में एक वनडे में हराया था तो कॉमेंट्री पर डेविड लॉयड ने कहा था की "यह नतीजा तो रिक्टर स्केल के भी बाहर" का है। उस ऑस्ट्रेलिया टीम ने लगभग 10 सालों तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सिक्का जमा रखा था और तब तक ऐशेज़ भी नहीं गंवाया था। न्यूज़ीलैंड पर यह जीत भी उसी स्तर का अपसेट माना जाएगा।
फ़र्क़ इतना है कि बांग्लादेश एक बेहतरीन विपक्षी टीम के विरुद्ध उसी के घर पर पांच दिन तक हावी रही। ऐसे नतीजे टीम की क़िस्मत बदल देते हैं।
बोर्ड को भी इस बात को पहचानना है। कि एक ख़राब फ़ॉर्म से चल रही टीम विपरीत परिस्थितियों में तेज़ गेंदबाज़ों और बल्लेबाज़ों के बलबूते पर विदेशी धरती पर जीतने का माद्दा रखती है। इस क़ामयाबी का सदुपयोग करना अनिवार्य है।

मोहम्मद इसाम ESPNcricinfo के बांग्लदेशी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सीनियर सहायक एडिटर और स्थानीय भाषा लीड देबायन सेन ने किया है।