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तेंदुलकर बनाम न्यूज़ीलैंड : एक युवा चैंपियन से वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता का लंबा सफ़र

रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ में सोमवार को इंडिया लेजेंड्स के कप्तान एक ऐसी टीम के ख़िलाफ़ भिड़ेंगे जिन के साथ उनकी कुछ बेहद यादगार पारियां जुडी हैं

Virender Sehwag, Sachin Tendulkar and Yuvraj Singh are all smiles after the series win, New Zealand v India, 5th ODI, Auckland, March 14, 2009

2009 में सचिन ने न्‍यूज़ीलैंड में वनडे के मैच में खेली थी 133 गेंद में 163 रन की पारी  •  Getty Images

सचिन तेंदुलकर रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ के तहत सोमवार को न्यूज़ीलैंड लेजेंड्स के ख़िलाफ़ खेलेंगे। ब्रायन लारा के साथ कानपुर में उनकी मुलाक़ात बारिश के भेंट चढ़ गई थी लेकिन हम उम्मीद कर सकते हैं कि इंदौर में ऐसा नहीं होगा। बहरहाल पिछले बार हमने आपको तेंदुलकर और लारा के यादगार मैचों के बारे में बताया था। इस बार आपको याद दिलाते हैं कि क्यों उनके 24 साल के अंतर्राष्ट्रीय करियर में न्यूज़ीलैंड का अहम स्थान रहा।

एक तेजस्वी करियर का आग़ाज़

1990 में भारत, न्यूज़ीलैंड में तीन टेस्ट सीरीज़ में 1-0 से पिछड़ रहा था जब दोनों टीमें नेपियर गईं। पहला दिन कोई खेल हो ना सका और दूसरा दिन भी पूरा खेल नहीं हो सका। तीसरे दिन 16 साल और साढ़े सात महीने के उम्र के तेंदुलकर स्टंप्स तक ज़बरदस्त एकाग्रता का परिचय देते हुए 80 पर नाबाद रहे। उनके सामने गेंदबाज़ी क्रम थी रिचर्ड हैडली, डैनी मॉरिसन, मार्टिन स्नेडन और जॉन ब्रेसवेल जैसे अनुभवी गेंदबाज़ों की। अगले दिन तेंदुलकर 88 तक पहुंचे और ऐसा लगा शायद वह मुश्ताक़ मोहम्मद के सबसे युवा टेस्ट शतकवीर बनने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, लेकिन मॉरिसन की एक गेंद को वह हवा में खेल बैठे और कैच कप्तान ने लिया, जो एक दशक बाद तेंदुलकर के करियर का फिर से बड़ा हिस्सा बनने वाले थे। जी हां, 2000 और 2005 के बीच कोच रहे जॉन राइट।

एक और नई शुरुआत

1994 में न्यूज़ीलैंड में वनडे सीरीज़ के दौरान ऑकलैंड में एक वनडे मैच की सुबह नवजोत सिंह सिद्धू के गर्दन में दर्द हुआ और ऐसे में वह मैच से बाहर हो गए। कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन और कोच अजित वाडेकर सोच ही रहे थे कि अजय जाडेजा के साथ किसे ओपनर बनाया जाए कि तेंदुलकर ख़ुद उनक पास गए और ओपन करने की इच्छा ज़ाहिर की। भारतीय गेंदबाज़ों ने कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए मेज़बान को केवल 142 के स्कोर पर रोका लेकिन इसके बाद समय आया तेंदुलकर के मास्टरक्लास का। 49 गेंदों पर 15 चौकों और दो छक्कों की मदद से 82 रन आए और भारत को ही नहीं विश्व क्रिकेट को मिला शायद वनडे इतिहास का महानतम सलामी बल्लेबाज़

कुछ कप्तानी पारियां

बतौर कप्तान, अक्सर यह बात की जाती है कि तेंदुलकर का रिकॉर्ड काफ़ी साधारण था। जहां इस बात में कुछ सच्चाई तो है ही, लेकिन यह भी याद रखना ज़रूरी है कि उन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम में निरंतरता और अनुभव का अभाव सा था। साथ ही उनकी कप्तानी में भारत को साउथ अफ़्रीका, पाकिस्तान (केवल वनडे के लिए), वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया जैसे चुनौतीपूर्ण दौरों पर जाना पड़ा।
फिर भी इस सब के बीच उन्होंने कुछ लाजवाब पारियां खेली थी और उनमें कई सारे न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध आए। 1997 के इंडिपेंडेंस कप में बेंगलुरु में उन्होंने 117 बनाते हुए नई गेंद जोड़ी के धागे ही खोल दिए। 1999 में पहले उन्होंने वनडे सीरीज़ में हैदराबाद में 186 की अविजित पारी से एक नया भारतीय रिकॉर्ड स्थापित किया और राहुल द्रविड़ के साथ रिकॉर्ड 331 रन जोड़े।
उसी दौरे पर टेस्ट सीरीज़ में अहमदाबाद में उनकी 217 रनों की पारी उनके करियर का पहला दोहरा शतक था। अगर कोई दावा करे कि कप्तानी ने तेंदुलकर की बल्लेबाज़ी पर असर डाला तो आप उनको न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेली गए पारियों को ज़रूर दिखाएं।

2009 के टाइटन

अपने 20 साल के करियर में तेंदुलकर ने हर देश में अच्छी बल्लेबाज़ी की थी और भारत को सफलता दिलाने में भूमिका अदा किया था लेकिन एक न्यूज़ीलैंड में ही भारत ना तो बहुत क़ामयाब रहा था, और कुल चार टेस्ट दौरों के बावजूद तेंदुलकर ने भी 1998 में वेलिंग्टन में ही इकलौता अंतर्राष्ट्रीय शतक मारा था।
2009 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में तेंदुलकर ने बल्लेबाज़ी क्रम की ज़बरदस्त अगुआई करते हुए भारत के सफलता में बड़ी भूमिका निभाई। वनडे सीरीज़ में क्राइस्टचर्च में वह 133 गेंदों पर 163 पर खेल रहे थे जब उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा। पारी में पांच ओवर बचे थे और वह जिस रफ़्तार से खेल रहे थे वह वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले पुरुष बन सकते थे (स्पॉयलर अलर्ट: उन्होंने एक साल बाद ठीक ऐसा ही किया)। इसके बाद हैमिलटन टेस्ट में जब भारत ने 520 रन बनाए तो तेंदुलकर की 160 रनों की पारी के साथ सबने साझेदारियां निभाते हुए भारत को एक यादगार जीत दिलाई।

देबायन सेन ESPNcricinfo में स्‍थानीय भाषा प्रमुख हैं।